सहारनपुर में सड़कों के निर्माण में ठेकेदार जबरदस्त खेल कर रहे हैं। अधिकारियों की मिलीभगत से हर सड़क के निर्माण में तकनीक से खिलवाड़ हो रहा है। यही कारण है कि सड़कें बनते ही टूट रही हैं, जो आए दिन सड़क हादसाें की वजह भी बन रही हैं।
सहारनपुर की ज्यादातर सड़कों की हालत इन दिनों खस्ताहाल हो चुकी है। आश्चर्य की बात यह है कि ये सड़कें अभी कुछ दिन पहले ही बनी हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि सड़क बनाने में घालमेल लोगों की जान तक पर बन आता है।
ठेकेदार ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में गुणवत्ता को भी ताक पर रख रहे हैं। पिछले करीब छह दिन से शंकलापुरी रोड का निर्माण कराया जा रहा है। पुुरानी सड़क पर मुश्किल से डेढ़ इंच की बजरी बिछाकर खानापूर्ति की जा रही है।
अनेक जगहों पर मिट्टी पर ही नाममात्र की तारकोल डालकर बजरी बिछा दी गई है। सड़क के दोनों ओर चढ़ी घास तक को हटाया नहीं गया है। ऐसे में हल्की सी बारिश होते ही सड़क पर पानी रुकना लाजिमी है।
सड़क पर बिछाई जा रही बजरी में भारी मात्रा में मिट्टी मिली हुई थी। बिना तारकोल ही बजरी को रोड रोलर के जरिए चिपकाने की कोशिश हो रही थी। ऐसे में सड़क पर कई जगह से तीन दिन में ही बजरी उखड़ना शुरू हो गई है।
उधर, दिल्ली रोड पर भी मरम्मत का काम चल रहा है। हैरत की बात यह है कि नेशनल हाइवे होने के बावजूद गड्ढों को भरने में लापरवाही बरती जा रही है। गड्ढों में पत्थर और मिट्टी भरने के बाद उसके ऊपर बिना तारकोल ही बिजरी बिछाई जा रही है।
सिविल इंजीनियर तरुण प्रकाश का कहना है कि सड़क की कुल मोटाई का करीब चार फीसदी हिस्सा ऊपरी परत का होता है, यानि वो परत जिस पर तारकोल का प्रयोग किया जाता है।
यदि इस परत की मोटाई, डामर की मात्रा और ढलान तय मानकों अनुरूप हो तो ऐसी स्थिति निर्मित न हो। उधर, एक साल में दिल्ली-गंगोह रोड न जाने कितनी बार बनी और बिगड़ी।
लिंक रोड, अस्पताल रोड, सहारनपुर-नागल रोड, कोर्ट रोड, सहारनपुर-छुटमलपुर रोड सहित कई सड़कों का निर्माण हुए ज्यादा समय नहीं बीता है, लेकिन इनके अधिकांश हिस्से में ऊपरी सतह उखड़ गई है। यहीं स्थिति पीडब्लूडी और एनएचएआई की सड़कों के साथ है।