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Saharanpur News: परंपरा को नहीं तोड़ पा रहे लोग, ताले में बंद है विद्युत शवदाह मशीन

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बंद पड़े विद्युत शवदाह गृह के सामने दाह के लिए पड़ी लकड़ियां सब कुछ बयां कर रही हैं।
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-20 महीने से नुमाइश कैंप स्थित श्मशान घाट में शवदाह गृह में बंद रखी है मशीन
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नुमाइश कैंप स्थित श्मशान घाट में विद्युत शवदाह गृह का नौ दिसंबर 2021 के बाद से ताला नहीं खुला है। दरअसल, लोग अपनों के शवों की अंतिम क्रिया पारंपरिक तरीके से लकड़ियों की चिता जलाकर ही कराना चाहते हैं, जिसके कारण विद्युत मशीन का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
कोरोना काल में श्मशान घाटों में शवों के दाह संस्कार के लिए लकड़ियां कम पड़ने के कारण यह जरूरत महसूस की गई थी कि महानगर के बड़े श्मशान घाटों में शवों के दाह के लिए विद्युत मशीन लगाई जाए। इसका सबसे बड़ा फायदा यह बताया गया था कि विद्युत मशीन से शवों के दाह करने में लकड़ियों की जरूरत नहीं रहेगी, जिससे पेड़ों का कटान भी नहीं होगा। यानी इससे हरियाली बची रहेगी। साथ ही शवों के अंतिम संस्कार में अधिक समय नहीं लगेगा और प्रदूषण भी नहीं होगा।
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नौ दिसंबर 2021 को तत्कालीन महापौर संजीव वालिया और नगर आयुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने मशीन की शुरुआत की थी। मशीन में सबसे पहले एक लावारिस लाश का दाह किया गया था, लेकिन उसके बाद से मशीन शव गृह के भीतर ताल में बंद पड़ी है।
श्री नीलकंठ धाम शिवपुरी सुधार सभा सदस्यों ने बताया कि लोग विद्युत मशीन से दाह संस्कार कराने को ठीक नहीं समझते हैं। उनकी मान्यता है कि पारंपरिक तरीके यानी लकड़ियों से दाह संस्कार कराना ही सही है। इसी से उनके मृतक परिजन की आत्मा को शांति मिलेगी।
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आईटीसी के सहयोग से बना था विद्युत शवदाह गृह
श्मशान घाट परिसर में विद्युत शवदाह गृह के लिए अलग परिसर बनाया गया है। इसमें एक बड़ा हॉल है, जिसके अंदर मशीन लगी है। हॉल के पीछे एक जनरेटर लगाया गया है। साथ में चिमनी लगी है। एक खुला क्षेत्र है, जिसमें टाइल्स बिछाई गई थीं। शवदाह गृह के निर्माण के साथ ही आईटीसी ने 53 लाख रुपये की मशीन दी थी। मशीन के लिए दस किलोवाट का विद्युत कनेक्शन लगाने के साथ ही प्लेटफॉर्म भी बनाया गया है। आपातकालीन स्थिति के लिए 25 केवीए का जनरेटर भी लगाया गया है।
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हर माह दाह संस्कार में लगती हैं करीब 720 क्विंटल लकड़ी
- महानगर में चोरों छोर पर चार श्मधान घाट हैं। नुमाइश कैंप, लालदास का बाड़ा, हकीकत नगर और अंबाला रोड स्थित श्मशान घाट हैं। प्रत्येक में हर माह 55 से 60 तक दाह संस्कार होते हैं। एक दाह संस्कार में कम से कम तीन क्विलंट लकड़ी लगती हैै। ऐसे में प्रत्येक माह करीब 720 क्विंटल लकडि़यां दाह संस्कार में जलती हैं।

पशुओं का भी बनेगा विद्युत शव गृह
शासन ने सभी नगर निगमों में पशुओं के शवों के निस्तारण के लिए विद्युत पशु शव दाह गृह बनाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम इसके लिए भी जमीन की तलाश में लगा है।
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वर्जन-
शवों के दाह के लिए विद्युत मशीन पूरी तरह चालू है, लेकिन काेई भी व्यक्ति अभी तक ऐसा नहीं आया है, जो अपने मृतक परिजन का दाह संस्कार मशीन से कराना चाहता हो। सभी लोग पारंपरिक तरीके से लकड़ियों के साथ ही अंतिम क्रिया कराते आ रहे हैं। ऐसे में मशीन का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
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राजकुमार जौली, महामंत्री श्री नीलकंठ धाम शिवपुरी सुधार सभा।
- नागरिकों को जागरूक किया जाएगा
- नुमाइश कैंप के श्मशान घाट में विद्युत शवदाह मशीन लगी है, जिसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। धर्म गुरुओं की बैठक की जाएगी। साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जाएगा।
- डॉ़ अजय कुमार, महापौर सहारनपुर
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