- कागजों में चलता मिला था मदरसा, संबंधित अधिकारी भी जांच में फंसे
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जिले के बादशाही बाग के 58 लाख के मदरसा घोटले मामले की जांच पूरी होने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होना तो दूर शासन को रिपोर्ट तक नहीं भेजी गई। तीसरी बार हुई जांच में तत्कालीन संबंधित विभाग के अधिकारियों पर भी आरोप लगे थे, लेकिन तीन वर्ष बाद भी मामले में कार्रवाई नहीं हुई है।
यह था मामला
बेहट क्षेत्र के बादशाही बाग में कादरिया उल उलमा एंग्लो मदरसा संचालित होना दिखाया गया था। इसमें बच्चों का दाखिला और हॉस्टल होना भी बताया गया। तीन वर्ष पूर्व मंडलायुक्त से शिकायत होने पर जांच हुई तो मदरसा कागजों में चलता मिला। जिस व्यक्ति के नाम यह मदरसा संचालित हो रहा था, उसने उच्चाधिकारियों को शपथ पत्र देकर बताया था कि वर्ष 2012 में मदरसा बंद कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी कागजों में मदरसा संचालित रहा। वर्ष 2016 और 2017 में छात्रवृत्ति के नाम पर सरकार से प्राप्त 58 लाख रुपये विभिन्न खातों के माध्यम से हड़प लिए गए थे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इसमें तत्कालीन विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत रही।
पहली जांच
मामले में सबसे पहली जांच क्षेत्र के तत्कालीन तहसीलदार ने की थी, जिसमें क्लीन चिट दे गई।
दूसरी जांच
दूसरी जांच जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के उपनिदेशक व तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शरद कुमार श्रीवास्तव ने जांच की थी, जिसमें दो अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा भी गड़बड़झाला करने की बात सामने आई थी।
तीसरी जांच
तीसरी बार दो वर्ष पूर्व अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की अध्यक्षता में डीआईओएस और डीडीओ ने जांच की। तीसरी जांच में भी फर्जीवाड़ा होने की पुष्टि हुई और पर्याप्त सुबूत मिले। अधिकारी फंस रहे हैं, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई है।
वर्जन:-
उनके कार्यकाल से पहले का मामला है। इस मामले की जानकारी नहीं है। मामले को दिखवाया जाएगा और अगर कहीं लापरवाही बरती गई तो शासन को अवगत कराकर कार्रवाई कराई जाएगी।विजय कुमार, मुख्य विकास अधिकारी