सहारनपुर के नानौता में शिया समुदाय के लोगों ने हजरत इमाम हुसैन व करबला के शहीदों की याद में चेहल्लुम का मातमी जुलूस गमगीन माहौल में नौहाख्वानी व सीनाजनी करते हुए निकाला।
सोगवारों ने अपने शरीर को जंजीरों से मातम करते हुए लहूलुहान किया। नगर की चारों अंजुमनों ने नोहाख्वानी की। मंगलवार को चेहल्लुम के मातमी जुलूस से पूर्व इमामबारगाह छत्ता में एक मजलिस के दौरान मौलाना हसन रजा ने तकरीर करते हुए हजरत इमाम हुसैन व करबला के शहीदों की
शहादत पर रोशनी डालते हुए कहा कि इस्लाम का आतंकवाद व आतंकी से कोई वास्ता नही है। इस्लाम में अपने वतन की मुहब्बत आधा इमान है।
हमें दहशतगर्दों व आतंकियों से अपने देश की रक्षा करनी चाहिए यही इस्लाम का पैगाम है। मजलिस के दौरान करबला का वाक्या सुनकर माहौल
गमगीन हो गया। सोगवारों की आंखों से आंसु छलक पड़े। तकरीर के बाद मातमी जुलूस इमामबारगाह छत्ता से शुरू होकर दादामीरा जी स्थित करबला इमामे हुसैन पर पहुंचा, जहां अजैदारों ने नोहाख्वानी व सीनाजनी करते हुए जुलूस को तमाम किया।
जुलूस के दौरान देशभक्ति का जजबा भी देखने को मिला। एक युवक हाथों में तिरंगा लेकर मातमी जुलूस में शामिल रहा। मातमी जुलूस में नगर की चारो अंजुमन, अंजुमन-ए-हैदरी, अंजुमन-ए-सरकार-ए-अबूतालीब, अंजुमन-ए-हुसैनियां, अंजुमन-ए-जुलफिक्कारे हैदरी के अब्बास जैदी, शब्बर हुसैन,
मौ. हुसैन बुंदू, हाशिम जैदी, शमा जैदी, मसाहिद हुसैन, तुफैल जाफरी, शमशाद हुसैन, अब्बी प्रधान, अली रजा, बरकत अली, नजेमूल हसन, फरजंद अली, सरफराज अख्तर, नवेद अख्तर, मुन्ना जैदी, शकील अख्तर, इबादत हुसैन, तफसीर, पप्पू जैदी, मुंशीफ रजा, जफर मेहंदी, फैय्याज अली, शोक
आबदी, गुलशन रजा, जहुर हैदर, तथा ग्राम नैनपुर सादात से मोहम्मद अब्बास, अली रजा, हुसैन रजा, राहिब हुसैन, शाह रजा, फैजान रजा, कासिम हुसैन, मौहम्मद आलम, अथर हुसैन, मोहम्मद कैफ आदि के अलावा सहारनुपर, लखनौती, गंगोह, थानाभवन, हलवाना, कुटेसरा, चिलकाना आदि से सोगवारों ने मातमी जुलूस में शिरकत की।