सहारनपुर। श्रावण मास की शिवरात्रि का पर्व मंगलवार यानि आज श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। शिवरात्रि की पूर्व संध्या में जिले भर में शिवालय रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया। वहीं, भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के लिए मंदिर समितियों ने व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी।
महानगर में श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर, श्री बागेश्वर महादेव मंदिर, श्री शिव महादेव मंदिर, श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर, श्री पाठेश्वर महादेव मंदिर, तहसील शिव मंदिर, श्री हरि मंदिर, श्री नारायणपुरी मंदिर, श्री बालाजी धाम, श्री औघड़दानी नर्मदेश्वर महादेव सहित कई मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों को पुष्प मालाओं से सजाया गया। श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ रहेगी। इसको लेकर बैरिकेडिंग भी लगाई गई है। ताकि लोग पंक्ति में आकर जलाभिषेक कर सकें। कांवड़ियों के लिए अलग से व्यवस्था की गई। इसी तरह अनेक मंदिरों में व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा कड़े किए इंतजाम
शिवरात्रि को लेकर पुलिस-प्रशासन की ओर से शिवालयों में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिरों में और आसपास पुलिस, पीएसी, आरएएफ व बीएसएफ के जवान भी तैनात रहेंगे। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों से भी नजर रखी जाएगी। इसको लेकर एसएसपी विपिन टाडा ने सभी थाना प्रभारियों और सुरक्षा में लगे जवानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। एसएसपी ने बताया कि सीसीटीवी कैमरों से भी मंदिरों में नजर रखी जाएगी। डॉग स्क्वॉड की मदद से भी चेकिंग अभियान चलेगा। संदिग्धों पर पुलिस की खास निगरानी रहेगी।
ऐसे करें भगवान शंकर की पूजा
स्वामी कालेंद्रानंद महाराज, आचार्य रोहित वशिष्ठ और अतुल जोशी महाराज ने बताया कि शिवरात्रि सर्वप्रथम शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव को हाथ जोड़कर प्रणाम करें। आसन बिछाकर भोलेनाथ की ओर मुख कर बैठ जाएं। पूजा की सामग्री वस्त्र, जनेऊ, गंगाजल, पुष्प चंदन, साबुत चावल, धूप, दीपक, बेलपत्र, धतूरे का फल और पुष्प, दूर्वा तुलसी पत्ते, फल व मिठाई अपने पास रख लें। पंचामृत में दूध, दही, देसी घी, शहद और शक्कर का मिश्रण करें। इन पांच वस्तु में यदि किसी एक वस्तु का अभाव हो तो गंगाजल का इस्तेमाल करें। मन में भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा करें। सर्वप्रथम जलाभिषेक कर शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं। इसके पश्चात पुष्प अर्पित करें और पंचामृत से स्नान कराएं। धूप बत्ती और दीपक से भगवान की आरती उतारें। पात्र में रखकर भगवान को मिठाई और फल आदि अर्पित कर दक्षिणा भी चढ़ाएं। एकांत स्थान में बैठकर ऊं नम: शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करें।
पूजन का शुभ मुहूर्त
सूर्योदय के साथ सामान्य श्रद्धालुओं के पूरे दिन जलाभिषेक का मुहूर्त है, जबकि कांवड़ियों के लिए शाम 6:46 मिनट से बुधवार की सुबह 09:11 बजे जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त रहेगा।