सहारनपुर के देवबंद में जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना सैय्यद महमूद मदनी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मोहम्मद अली जिन्ना की फोटो को लेकर उत्पन्न हुई स्थिति पर चिंता जताई है।
मदनी का कहना है कि हमारे बुजुर्गों ने जिन्ना को अपना आदर्श नहीं माना और न ही उनके सिद्धांत का समर्थन किया, लेकिन इस मामले में पुलिस ने जिस तरह निहत्थे छात्रों पर लाठियों से हमला किया वो घोर निंदनीय है।
शुक्रवार को जारी बयान में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर ऐसा मुद्दा नहीं है जिसके लिए यूनिवर्सिटी के छात्र अपनी जान और इज्जत का बलिदान पेश करें।
हमारे बुजुर्गों ने जिन्ना को अपना आदर्श नहीं माना और न ही उनके सिद्धांत का समर्थन किया। बल्कि इस देश में हमारा रहना ही इस बात का प्रतीक है कि हमने उनके द्विराष्ट्र सिद्धांत को सिरे से खारिज कर दिया।
लेकिन उसके बावजूद सिर्फ तस्वीर को बहाना बनाकर जिस तरह से फिरकापरस्त प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय में विरोध किया और पुलिस ने निहत्थे छात्रों पर लाठियों से हमला किया वह किसी भी लोकतांत्रिक देश में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस तरह से देश के बड़े विश्वविद्यालय को निशाना बनाया जाना निंदनीय है। मौलाना मदनी ने कहा कि निजी समूहों द्वारा शक्ति का उपयोग देश को अराजकता और बरबादी की ओर ले जाएगा।
यह बहुत ही दुख की बात है कि राष्ट्रीय हित की अनदेखी करके ऐसे तत्वों को देश के कुछ प्रभावशाली लोग पोसने का काम कर रहे हैं। कुछ लोग सांप्रदायिक उत्तेजनाओं के कारण हमारे ऊपर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंगुली उठाई जा रही है कि हमारा रवैया अल्पसंख्यकों, उनके धर्मों और उनके संस्थानों के प्रति निष्पक्ष नहीं है।
इस तरह की गुंडागर्दी से देश की ओर बदनामी होगी। मौलाना मदनी ने विश्वविद्यालय के छात्रों से धैर्य से काम लेने और परंपराओं का दामन मजबूती से पकड़े रहने की अपील की है।