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वातानुकूलित रोडवेज बस में चिकित्सा के लिए महज दो गोली

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रोडवेज की एसी बस, जिसमें लगे फर्स्ट एड बॉक्स में दो ही गोली नजर आईं। - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। रोडवेज बस में यदि आप सफर कर रहे हैं तो किसी हादसे में घायल होने या अचानक बीमार पड़ने पर आपको प्राथमिक चिकित्सा की तत्काल जरूरत होती है। इसके लिए ही परिवहन निगम की ओर से हर श्रेणी की बसों में फर्स्ट एड बॉक्स रखने का दावा किया जाता है। विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस पर इसी सुविधा की हकीकत जानने के लिए रविवार को अमर उजाला टीम ने रोडवेज बसों में स्थिति देखी तो दावों की पोल खुल गई। सामान्य श्रेणी की बस तो छोड़िए सहारनपुर से आगरा की ओर जाने वाली वातानुकूलित बस के फर्स्ट एड बॉक्स में पैरासिटामोल की दो ही गोलियां मिलीं। परिचालक ने बताया कि कुछ गोली बैग में रहती हैं। अन्य बसों के हालात भी कमोबेश ऐसे ही मिले। पेश है रिपोर्ट....।
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केस नंबर एक : सैनिटाइजर तो है बाकी दवाएं नहीं
मुरादाबाद रूट पर बस संचालित करने वाले एक परिचालक ने खुलासा किया कि बस ले जाते समय उन्हें सैनिटाइजर तो मिला है। मगर बाकी दवाएं नहीं। वैसे भी प्राथमिक चिकित्सा के लिए दवाओं की जरूरत बहुत कम ही पड़ती है। दो तीन महीने में ही किसी यात्री को जरूरत पड़ती है।
परिचालक बताएगा मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं
केस नंबर दो : दिल्ली की ओर जाने वाली रोडवेज बस के चालक ध्यान सिंह ने कहा कि बस में फर्स्ट एड बॉक्स तो रखना होता है। लेकिन इसके बारे में परिचालक को पता है। मुझे दवाओं और बॉक्स के बारे में ज्यादा नहीं पता है। यह चालक जरूरी दवाओं के नाम तक नहीं बता पाया।
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केस नंबर तीन : मेडिकल बॉक्स वाला रैक ही नहीं
दिल्ली रूट की ही एक बस में न तो चालक था और न ही परिचालक। चालक की ओर ऊपर की ओर बने रैक देखे तो पता चला कि एक भी रैक पर न तो चिकित्सा संकेत बना है और न ही किसी में दवा ही रखी हुई थी।
केस नंबर चार : बैग में रखते हैं, परिचालक के पास होगी
शामली की ओर जाने वाली बस में इस बारे में जैैसे ही चालक से पूछने की कोशिश की तो मुंह फेर लिया। बाद में बोला मेडिकल बॉक्स तो नहीं है मगर कुछ दवाएं बैग में रखते हैं। परिचालक के पास जरूर होगी। वह अभी टाइम चेकिंग पर गए हैं।
केस नंबर पांच : अभी तो बसें ही चली हैं साहब...दवा भी रख लेंगे
दिल्ली रूट पर जा रही एक बस के परिचालक से फर्स्ट एड बॉक्स के बारे में पूछा तो अलग ही तर्क दिया। वह बोला कि अभी तो बसें चलनी ही शुरू हुई हैं साहब...दवा भी रख लेंगे। कौन सी दवा रखेंगे तो कहा, वही सिरदर्द, जुकाम और दर्द वाली दवाएं।
कम से कम यह होना चाहिए फर्स्ट एड बॉक्स में
- पैरासिटामोल या दर्द निवारण की अन्य गोलियां
- चोट लगने के लिए बिटाडिन या अन्य मरहम
- बुखार, उल्टी और दस्त के लिए जरूरी दवाएं
- कॉटन की पट्टी
- कैंची
- सेवेलॉन/डिटोल या स्प्रिट
लॉकडाउन में रह गईं थीं कुछ बसें : एआरएम
- रोडवेज के क्षेत्रीय सहायक प्रबंधक जगदीश सिंह कहते हैं कि कोरोना संक्रमण काल में रोडवेज बसें काफी देर से संचालित हुई हैं। डिपो की 100 से अधिक बसों को प्राथमिक चिकित्सा के लिए दवाएं उपलब्ध कराई गई थीं। लॉकडाउन में कुछ बसें रह गई थीं। जो बसें बची हैं, उन्हें भी कवर किया जाएगा।

फर्स्ट एड बॉक्स के बारे में इस चालक से पूछा तो उसने कोई जवाब नहीं दिया और गाड़ी चलाने लगा।- फोटो : SAHARANPUR

एक रोडवेज बस की ऊपरी रैक, जिसमें किसी पर भी चिकित्सा संकेत नहीं।- फोटो : SAHARANPUR

रोडवेज बस चालक ध्यान सिंह, जिसने कहा उसे दवाओं के बारे में ज्यादा पता नहीं।- फोटो : SAHARANPUR

रोडवेज बस अड्डे पर फर्स्ट एड बॉक्स के बारे में बताता मुरादाबाद रूट का परिचालक।- फोटो : SAHARANPUR

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