सहारनपुर जनपद में अर्बन सीलिंग की जमीन के मामले में चल रही जांच में चौकाने वाली जानकारी सामने आई है। जमीन के रखरखाव की जिम्मेदारी विकास प्राधिकरण के पास है, लेकिन अब जांच में पता चला है कि पिछले 25 साल में सीलिंग की जमीन के अलग-अलग हिस्सों का सात बार बैनामा हुआ। इसकी अधिकारियों को भनक तक नहीं लग सकी।
दरअसल, मामला पेपर मिल रोड स्थित अर्बन सीलिंग की जमीन के खसरा नंबर 262/1 का है। खसरे की 3073.80 वर्गमीटर जमीन को चार सितंबर 1993 को तहसीलदार सदर को कब्जा दाखिल किया गया था। इसके बाद जमीन के रखरखाव का जिम्मा सहारनपुर विकास प्राधिकरण को 28 जनवरी 2002 को दे दिया गया। अर्बन सीलिंग की जमीन काफी कीमती है।
ऐसे में कुछ लोगों ने जमीन का प्रारूप भी फर्जी हस्ताक्षर कर बदल दिया था। इसके साथ ही कर्मचारियों के साथ मिलकर अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर उसे सीलिंग से मुक्त दिखा दिया गया। पिछले साल अगस्त माह में तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इसकी जांच शुरू कराई थी। फिलहाल जारी है।
जांच में आया है कि जमीन के अर्बन सीलिंग की होने के बाद भी कई बार बैनामा हुआ। प्राधिकरण के अंतर्गत आने के बाद जमीन 2010 से 2013 के बीच सात बार खरीदी और बेची गई। इसमें पहला बैनामा 16 अगस्त 2010 को हुआ। इसके बाद 21 मई 2010 को जमीन के एक अन्य हिस्से का बैनामा कराया गया।
27 जुलाई 2010, दस अप्रैल 2010, 20 फरवरी 2014 और 24 दिसंबर 2013 को अर्बन सीलिंग की इसी खसरे में स्थित जमीन का बैनामा कराया गया। बता दें, अर्बन सीलिंग की जमीन वह भूमि होती है, जिसे सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में कर लेती है।
निलंबित हो चुका है लेखपाल
इसी मामले में जमीन पर इमारत के लिए मानचित्र की एनओसी देने में लेखपाल को भी निलंबित किया जा चुका है। लेखपाल ने जमीन को सीलिंग से मुक्त दिखाते हुए नायाब तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर कर तहसीलदार की मुहर लगा दी थी।
इसके बाद राजस्व विभाग ने जांच के बाद लेखपाल को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। इसकी भी जांच जारी है। इस प्रकरण में फिलहाल जांच चल रही है। सीलिंग जमीन के बैनामे होना गंभीर मामला है। इसे भी जांच में शामिल कर लिया गया है, जो भी दोषी होगा कार्रवाई की जाएगी। - सलिल कुमार पटेल, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व