सहारनपुर। उप्र सड़क परिवहन निगम ने बसों का किराया तो बढ़ा दिया, लेकिन यात्रियों को सुविधाएं देने में फिसड्डी है। बसों की हालत इतनी खराब है कि फटी सीटों पर यात्री सफर करने को मजबूर हैं। रोडवेज बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में दवाएं नहीं है तो अग्निशमन यंत्र सिर्फ नाम के लगे हैं।
सहारनपुर परिवहन निगम परिक्षेत्र में करीब 578 बसों का बेड़ा है। ये बसें सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, खतौली, छुटमलपुर, शामली और गंगोह डिपो से संचालित होती हैं। हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और पूर्वांचल में लखनऊ, गोरखपुर के अलावा इटावा, आगरा, अलीगढ़, बुलंदशहर आदि शहरों में बसें जाती हैं। छह फरवरी को परिवहन निगम मुख्यालय ने रोडवेज बसों में 25 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराये में बढ़ोतरी की थी। उसी के अनुसार यात्रियों से बढ़ा हुआ किराया लिया जा रहा है।
शुक्रवार को अमर उजाला ने दिल्ली रोड स्थित कांशीराम काॅलोनी में अस्थायी बस स्टैंड की पड़ताल की तो कई हकीकत सामने आ गई। यात्रियों को सुरक्षा व सुविधा देने का दावा करने वाले परिवहन निगम की पोल खुल गई। सहारनपुर से दिल्ली रूट की बसों की पड़ताल की गई तो किसी में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले तो अधिकतर बसों में फर्स्ट एड बॉक्स ही नहीं थे। जिन बसों में थे, तो उनमें दवाई नहीं थी। एक बस में चालक से इसे खुलवाकर देखा तो उसमें मिट्टी जमी थी। अग्निशमन यंत्र भी सिर्फ नाम के लगे हुए मिले। वह काम नहीं कर रहे थे। अगर किसी दिन बस में आग लग गई तो बुझ नहीं सकेंगी। यहीं नहीं कुछ बसों की सीटें भी फटी मिलीं।
मूलभूत सुविधाएं भी नदारद
महानगर में रोडवेज को कोई स्थायी बस स्टैंड नहीं है। वर्तमान में तीन स्थायी रोडवेज बस स्टैंड हैं, जिनमें कांशीराम काॅलोनी, मानकमऊ और जेल चुंगी बस अड्डा शामिल है। इन तीनों बस स्टैंड पर यात्रियों की मूलभूत सुविधाएं भी नदारद हैं। तीनों ही बस अड्डे सड़कों पर ही संचालित हो रहे है। यहां रोडवेज का कोई भवन नहीं है। धूप, बरसात और सर्दी से बचाव के लिए यात्री शेड नहीं है। बैठक की कोई सुविधा नहीं। यहां तक की शुद्ध पेयजल और शौचालय की कोई सुविधा नहीं हैं। ऐसे में महिला यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।
इतना लिया जा किराया:
- सहारनपुर से देहरादून का 105 रुपये, हरिद्वार का 144, लखनऊ का 909, मुजफ्फरनगर का 119, अलीगढ़ कर 428, मेरठ का 210, आगरा का 553, शामली का 100, अंबाला का 131 और दिल्ली तक का 257 रुपये किराया प्रति यात्री हो गया है।
- यहां स्थायी बस अड्डा नहीं होने से तीनों बस स्टैंड सड़कों पर ही संचालित है, इसलिए मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा सकती। रोडवेज बसों में अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स की जांच कराई जाएगी। यदि किसी में अग्निशमन यंत्र नहीं चल रहा है तो वह गंभीर है। जिन बसों की सीट फटी हुई है या फिर खराब हो गई है, उन्हें बदलवाया जाएगा।
- परवेज बशीर, प्रभारी क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम