जिले में डेंगू और बुखार सहित अन्य बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। गांवों में बुखार तेजी से फैल रहा है और स्वास्थ्य विभाग इस पर रोकथाम के प्रयास की बजाय लापरवाह बना हुआ है। काम के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जाती है।
बुखार के साथ ही अब डेंगू के मरीज भी आने लगे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अब तक एक भी डेंगू के मरीज की पुष्टि नहीं की है। जबकि निजी अस्पतालों में चिकित्सक डेेंगू का इलाज कर रहे हैं। जो महंगा पड़ रहा है।
सबसे बड़ी बात यह है कि जिला अस्पताल में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से दवा भी कम पड़ने लगी है। उधर, इस बार वायरल ने भी अपना रूप बदला है, ऐसे में चिकित्सक उपचार के दौरान हैरान है। यही कारण है कि बुखार, मलेरिया और डेंगू के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग इनके रोकथाम पर बेपरवाह है।
बारिश के चलते मौसम में आई नमी के कारण खादर क्षेत्र के गांवों सहित पूरे जिले में बुखार और उसके अलग-अलग प्रकार के रोगों का खतरा बढ़ गया है। कुछ महीने पहले स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे कर चार लाख की आबादी को मलेरिया और डेंगू के लिए हाईरिस्क जोन में माना था। हर साल की तरह इस बार भी बरसात के मौसम से बुखार, मलेरिया और डेंगू का सिलसिला शुरू हो गया है।
इस बार बुखार के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग डेंगू के एक भी केस की पुष्टि नहीं कर रहा है। मगर, निजी अस्पतालों में वायरल और बुुुखार से अलावा डेंगू तक का इलाज हो रहा है। उधर, जिला अस्पताल में बुखार के मरीज कई गुना बढ़ने से यहां दवाओं की कमी हो गई है।
जिला अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि बुखार के कई गुना मरीज आने से कई दवाएं समाप्त हो गई हैं। ऐसे में विकल्प के तौर पर मौजूद दवाओं से ही काम चलाया जा रहा है।
आपको बता दें कि सहारनपुर में वर्ष 2000 से 2010 तक के बीच में दिमागी बुखार का प्रकोप था और इस दौरान 500 से ज्यादा की मौत हो चुकी हैं। इसके अलावा भी बुखार से हर साल सैकड़ों लोगों की मौत हो रही हैं। मगर, स्वास्थ्य विभाग इन बीमारियों से बचाने की बजाय इनके प्रकोप के बाद कागजी खानापूर्ति करने में जुटता है।