न बनी कूड़े से बिजली और न हुआ संपूर्ण कूड़े का निस्तारण
सहारनपुर। स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 की परीक्षा में सहारनपुर प्रदेश के अन्य शहरों की सूची में कहां पर खड़ा होता है यह तो सर्वेक्षण परिणाम से सही सामने आएगा। लेकिन धरातल पर दिख रही निगम की व्यवस्था और शहर की सफाई व जगह जगह पड़े कूड़े के ढेर निगम प्रशासन की कार्य प्रणाली पर अंगुली उठा रही है। निगम प्रशासन ने पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण में भले ही कुछ अच्छा स्थान प्राप्त किया हो लेकिन इस बार स्थिति अच्छी नहीं है। क्योंकि इतने साल में नगर निगम प्रशासन कूड़े का पूरी तरह निस्तारण कराने में भी कामयाब नहीं हो पाया है।
शहर में जगह जगह सड़कों के किनारे खुले में पड़ता है कूड़ा
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में कहीं पर भी सड़क किनारे अथवा सार्वजनिक स्थान पर कूड़ा नहीं डलना चाहिए। सरकार ने ऐसे सभी डलाव घरों को विलुप्त कराने के निर्देश दिए हुए हैं। स्वच्छ भारत मिशन को अमलीजामा पहनाने और सरकार के आदेशों पर अमल करने के लिए नगर निगम प्रशासन कितना गंभीर है। इसकी बानगी शहर में एक दर्जन से भी अधिक स्थानों पर खुले में पड़ रहे कूड़े में देखी जा सकती है। डलाव घरों पर सुबह से शाम तक कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इतना ही नहीं खाली प्लांट भी डलाव घर बन गए हैं।
डंपिंग ग्राउंड की चारदीवारी कर भूल गए निगम
- नगर निगम प्रशासन ने डेढ़ वर्ष पहले स्थायी डंपिंग ग्राउंड के लिए बेहट रोड पर भूमि खरीदी। इतने समय में निगम प्रशासन केवल डंपिंग ग्राउंड पर चारदीवारी कराने में ही कामयाब हो सका है। इससे आगे की व्यवस्थाओं को नगर निगम के अधिकारी भूल गए हैं। निगम की इस सुस्त कार्यप्रणाली की वजह से नगर निगम स्वच्छ सर्वेक्षण में उस रैंक को हासिल नहीं कर सका जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निगम के अधिकारी डंपिंग ग्राउंड चालू न होने का ठीकरा कोरोना के सिर फोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि सात से आठ माह कोरोना में चले जाने की वजह से डंपिंग ग्राउंड चालू नहीं हो सका है।
कूड़े से बिजली बनाने का प्रोजेक्ट फाइलों में कैद
- स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में कहीं पर भी कूड़ा नहीं दिखना चाहिए। इसके लिए एनजीटी ने नगर निगम प्रशासन को कूड़ा निस्तारण के निर्देश दिए हुए हैं। नगर निगम प्रशासन ने शहर की जनता को कूड़े से बिजली बनाए जाने का सपना दिखाया था। जो अभी तक सपना बनकर रह गया है। पूरा प्रोजेक्ट फाइलों में कैद है। निगम अधिकारियों की इस कार्य प्रणाली से सहारनपुर नगर निगम को स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में अच्छा स्थान मिलता नहीं दिख रहा है।
एमआरएफ सेंटरों ने दी राहत
नगर निगम ने स्वच्छता की दिशा में 11 एमआरएफ (मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर बनाए हैं। जिनपर वार्डों से लाए गए कूड़े को अलग अलग किया जाता है। कचरे से लोहा, कांच और प्लास्टिक आदि भी अलग कर रिसाइक्लिंग के लिए भेजी जाती है।
शहर से निकलता है 130 टन कचरा
नगर निगम सहारनपुर में कुल 70 वार्ड हैं। जिनमें रोज करीब 130 टन कचरा निकलता है। हालांकि इनमें उन 32 गांवों का कचरा शामिल नहीं है जो नगर निगम के गठन के दौरान शहर में शामिल किए गए थे। कचरे का निस्तारण न होने के कारण गंदगी के ढेर हैं।
डंपिंग ग्राउंड लगभग तैयार है। इसके अलावा नगर निगम कचरे से बिजली बनाने के प्लांट पर भी काम कर रहे हैं। कचरा निस्तारण के लिए शहर में एमआरएफ सेंटर बनाए गए हैं।
-- डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
एमआरएफ सैंटर पर कचरा अलग करते कर्मी- फोटो : SAHARANPUR