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सरकारी अस्पतालों में डेंगू की जांच के इंतजाम नहीं

Mon, 19 Sep 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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mosquito, - फोटो : demo
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सहारनपुर जनपद में डेंगू से मौत होने का सिलसिला जारी है। मरीजों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग बीमारी से ग्रस्त मरीजों को इलाज देने के बजाय डेंगू को छुपाने में लगा है। यही कारण है कि पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण मरीज आए दिन दम तोड़ रहे हैं। 
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स्वास्थ्य विभाग एक ओर जहां डेंगू से बचाव के बड़े दावे कर रहा है, वहीं हकीकत यह है कि सरकारी अस्पतालों में डेंगू की जांच के उपकरण तक नहीं है।

ऐसे में मरीज निजी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की हिदायत के चलते वे भी डेंगू के मरीजों का उपचार करने से कतरा रहे हैं। निजी अस्पतालों के चिकित्सकों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से सख्त हिदायत दी गई है कि मरीज में डेंगू की पुष्टि होने के बाद भी उनका इलाज न किया जाए।

डेंगू के मरीजों को इलाज केवल सरकारी अस्पतालों में ही किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के इस मनमाने रवैये के कारण भी डेंगू बढ़ रहा है।  
सहारनपुर। डेंगू से डरने के बजाय बचाव जरूरी है। वरिष्ठ फिजीशियन डा. संजीव मिगलानी बताते है कि सर्वे के मुताबिक डेंगू निम्न तीन तरह से अपने लक्षण दिखाता है।   
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 डेंगू बुखार (क्लासिकल) 
 डेंगू हेमरेजिक फिवर (डीएचएफ) 
 डेंगू शोक सिंड्रोम (डीएसएस) 

डेंगू बुखार (क्लासिकल) के लक्षण 
 सिर में दर्द 
 आंखों के पीछे दर्द 
 मांसपेशियों, जोड़ों में दर्द]  जी कच्चा और उल्टी आना 
 पेट में दर्द 
 ल्यूकोपीनिया 
 शरीर में दाने निकलना 

डेगू हेमरेजिक फीवर (डीएचएफ) के लक्षण 
 बुखार 
 प्लेट लेट्स कम होना।  
 शरीर के किसी हिस्से जैसे मुंह, नाक, कान, पेेेशाब में या शौच के साथ खून आना।  
 फेफड़ों में, पेट और दिल में पानी भर आना।  
डेंगू शोक सिंड्रोम (डीएसएस) 
 ब्लड प्रेशर 90 से नीचे चला जाना 
 प्लस रेस 110 से ज्यादा हो जाना 
 बहुत ज्यादा बेचैन होना 
 गफलत में चले जाना 
 हाथ पैर ठंडे हो जाना 

डेंगू के जटिल लक्षण 
 पेट में लगातार दर्द बना रहना 
 उल्टी का लगातार बने रहना 
 बुखार के साथ सांस फूलना 
 बुखार के साथ पेशाब का लाल और पीला आना 
 शौच का काला आना 
 होठ,जीभ का नीला पड़ जाना 
 बुखार के साथ दौरा पड़ना 
बुखार के साथ कोमा में जाना 

डेंगू बुखार के टेस्ट 
 डेंगू के मुख्य इलाज टेस्ट है। बुखार के पांच दिनों में एनएस-1 पॉजिटिव होता है। 
 बुखार के पांच दिन बाद आईजीएम, आईजीजी और एंटी बॉडी पॉजिटिव होता है। 
डेंगू बुखार के बचाव और तरीके 

 कूलर, गमले का पानी रोज बदलते रहे। यदि जरूरत न हो तो कूलर में पानी न रखें। 
 घर में और उसके आसपास पानी इकट्ठा न होने दें। 
 सफाई पर विशेष ध्यान दें। 

 यदि घरों में बर्तन में पानी भरकर रखते हैं तो उसे ढक कर रखें। 
 ऐसे कपडे़ पहने जो शरीर के अधिकतर हिस्से को ढक कर रखें। 
 घर में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। 

 मच्छर से बचने के लिए दरवाजे और खिड़कियों में जाली लगाएं। 
यदि आसपास में किसी को यह संक्रमण है तो सावधानी बरतें। 
 खिड़की के पास तुलसी  लगाएं। 

 नीम की सुखी पत्तियों और कपूर के धुएं से मच्छर कोने कोने से निकल कर भाग जाते हैं। 
डेंगू का प्राथमिक उपचार 
 यदि 101 से ज्यादा बुखार है तो ठंडे पानी की पट्टी रखें। 
 नारियल पानी और नीबू पानी, ओआरएस और तरल पदार्थों का सेवन करें। 

 विटामिन सी वाले फल जैसे मौसमी, आंवला और संतरे का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। 
 नीम, तुलसी, गिलोय, पपीते की पत्तियों का रस लेेंं। 
इनको ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता 

 दमे के मरीज 
 65 साल से ज्यादा के मरीज 
 हाइपरटेंशन के मरीज 
 किडनी, दमा व हार्ट के मरीज 
 गर्भवती महिलाएं।   
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