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न डॉक्टर न दवाई, अस्पतालों की व्यवस्था चरमराई

Fri, 07 Apr 2017 12:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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सहारनपुर के जिला अस्पताल में रोगियों की मारामारी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में प्रदेश की योगी सरकार ने भले ही यूपी में छह एम्स जैसे संस्थानों का निर्माण करने, नए मेडिकल कॉलेज खोलने तथा जिला अस्पतालों का स्तर ऊंचा उठाते हुए मेडिकल कॉलेज का दर्जा देने का निर्णय लिया है, परंतु सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत में कोई सुधार नहीं आया है। 
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आज भी सीएचसी व पीएचसी में जरूरी चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हैं। जिला अस्पताल में भी विशेषज्ञों का टोटा है और मरीजों की लंबी कतार। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि गरीब व्यक्ति सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ कैसे प्राप्त कर सकेगा।

इतना ही नहीं, सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केन्द्रों में तैनात चिकित्सक अपनी ड्यूटी की बजाय प्राइवेट प्रैक्टिस में ज्यादा संजीदा रहते हैं। पूरे जिले में 185 चिकित्सकों के पद पर केवल 65 डाक्टर ही तैनात हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चिकित्सकों की सलाह दी है कि वे मरीजों से दो मिनट बात करें। मगर, चिकित्सकों की कमी झेल रहे जिला अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार और भीड़ के चलते डॉक्टर चाहकर भी मरीज से कोई बात नहीं कर पाते।

यहां चिकित्सकों के कुल 61 पद हैं, जबकि 26 डाक्टर ही यहां मौजूद हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अस्पताल में हर दिन करीब चार हजार मरीज आते हैं। इनमें त्वचा, बुखार के सबसे ज्यादा मरीज होते हैं।

ऐसे में एक डाक्टर को दिन में 200 से 500 मरीज तक देखने पड़ जाते हैं। इसके अलावा ज्यादातर चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस भी करते हैं तो अस्पताल में खानापूर्ति कर वे अपने क्लिनिक की दौड़ लगाते हैं।

नकुड़-मल्हामाजरा रोड पर स्थित सीएचसी में रोजाना चार सौ से पांच सौ मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके सीएचसी में सीएचसी प्रभारी डा. रोहित वालिया के अलावा एमओ डॉ. अमन गोपाल एवं एक महिला चिकित्सक दिव्या सैनी व एक संविदाकर्मी डा. घनश्याम सिंह (आयुर्वेद) ही तैनात हैं,

जबकि डेंटिस्ट डा. रुचिका राणा छुट्टी पर चल रही हैं। सीएचसी में चिकित्सकों की कमी तथा बेहतर चिकित्सा सुविधा न मिलने पर मरीजों को निजी चिकित्सकों के यहां महंगे इलाज या जान जोखिम में डालकर झोला छापों से इलाज को मजबूर होना पड़ रहा है।

सीएचसी में खांसी, जुखाम, मलेरिया व टायफाइड बुखार व खाज-खुजली आदि छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के अलावा गंभीर रोगों के मरीजों के लिए लिए न तो जांच के साधन हैं और नहीं इनके इलाज के लिए डाक्टर हैं।

इतना ही नहीं झगड़े फसाद व सड़क हादसों में घायलों को यहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इनमें से गंभीर रूप से घायल कई मरीज तो रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। 
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