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कुरान में कयामत तक नहीं किया जा सकता कोई बदलाव

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गंगोह। जमीयत उलमा के कौमी सदर एवं उस्ताद-ए-हदीस कारी सैयद मो. उस्मान मंसूरपुरी ने कहा कि कुरान अल्लाह का कलाम है। इसमें किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। कुरान हिफ्ज करने वाले छात्रों की दस्तारबंदी भी की गई।
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शनिवार की रात मोहल्ला कोटला स्थित मदरसा मुहम्मदिया तब्लीग-उल-कुरआन वस्सुन्नह में जलसा-ए-दस्तारबंदी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दारुल उलूम देवबंद के उस्ताद-ए-हदीस कारी सैयद मो. उस्मान मंसूरपुरी ने कहा कि कुरआन-ए-मुकद्दस दोनों जहां की कामयाबी अपने अंदर लिए हुए है। कहा कि कुरान पूरी इंसानियत के लिए हिदायत है, इसलिए सभी को इसकी तालीम और तबलीग जरूर करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुरान अल्लाह का कलाम है, इसमें कयामत तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कुरान हिफ्ज करने व इसकी तिलावत करने को सबसे बड़ा सवाब बताया। उन्होंने कहा कि मदरसे दीन के सतून हैं, इनकी हिफाजत करना हर मुसलमान का फर्ज है। उन्होंने मुसलमानों से अपील कर कहा कि वह अच्छे अखलाक पेश कर अपना मजहबी फर्ज अदा करें। इस अवसर पर कुरान हिफ्ज करने वाले छात्रों की दस्तारबंदी भी की गई। इससे पूर्व जलसे का शुभारंभ नात-ए-पाक व तिलावत-ए-कुरान के साथ किया गया। अंत में मुल्क व कौम की सलामती के लिए दुआ कराई गई। सैयद सलमान, मो. नोमान, सैयद माजिद, मो. हुजेफा आदि रहे।
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