हारनपुर। महानगर को भले ही स्मार्ट सिटी का दर्जा हो, लेकिन यहां रोडवेज बस स्टैंड के लिए तो ठिकाना पहले से ही नहीं था, अब ऑटो भी सड़कों पर आ गए हैं। ऑटो पहले रेलवे स्टेशन के सामने खाली जगह पर खड़े हो जाते थे, लेकिन रेलवे स्टेशन के सुंदरीकरण के चलते अब उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अब बस और ऑटो दोनों ही सड़क पर खड़े होते हैं। जो जाम का कारण बन रहे हैं।
करीब चार साल पहले सहारनपुर स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल हुआ था। तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि स्मार्ट सिटी बनने से विकास रफ्तार पकड़ेगा। हालांकि, कुछ सुधार जरूर हुए, लेकिन दशकों पुरानी बस अड्डे की समस्या पूरी नहीं हो पाई। इसके लिए न केवल अधिकारियों ने प्रयास किए, बल्कि जनप्रतिनिधियों ने भी शासन में पत्र लिखे। यहां तक परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी जिले का दौरा कर चुके है। उन्होंने मानकमऊ और कांशीराम काॅलोनी से संचालित होने वाले बस अड्डों का निरीक्षण भी किया था। तब से लेकर अब तक समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। रेलवे रोड, मानकमऊ और कांशीराम काॅलोनी से रोडवेज बसें सड़कों से चल रही हैं। कई बार नगर निगम रोडवेज बसों के सड़कों पर खड़े होने की वजह से चालान भी कर चुका है।
यहीं नहीं रेलवे स्टेशन, घंटाघर, अंबाला रोड, देहरादून चौक आदि मुख्य चौराहों पर ऑटो खड़े रहते हैं। इनके खड़े होने के लिए भी महानगर में कहीं पर भी स्टैंड नहीं है। यह भी सड़कों पर ही खड़े रहते हैं। इनकी वजह से शहर में जाम के हालात बने रहते हैं। अगर महानगर में बस स्टैंड के लिए जगह मिल जाए तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो जाएगा।
नगर निगम ने खाली करा ली थी जमीन
परिवहन निगम की बसें कई साल तक अंबाला रोड पर खाली नगर निगम की जमीन से संचालित होती रही। उसमें नगर निगम ने काम शुरू कराया तो रोडवेज से जमीन को खाली करा लिया गया। उसके बाद से रोडवेज बसें मानकमऊ और दिल्ली रोड स्थित कांशीराम काॅलोनी से ही संचालित हो रही हैं। यहां पहुंचने के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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महानगर में तीन जगहों से रोडवेज की बसें संचालित हो रही हैं। स्थायी बस अड्डे को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। सभी प्रक्रिया शासन स्तर से ही पूरी होनी है। जैसे ही शासन स्तर से बस अड्डे को लेकर कोई आदेश आएगा। उसका पालन होगा। - योगेंद्र प्रताप सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम