सहारनपुर में बागी हुए कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। इनमें कई कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने पार्टी प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं। यह प्रमुख प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ रहे हैं। भाजपा में ऐसे कार्यकर्ताओं की संख्या ज्यादा है, जबकि सपा, कांग्रेस और बसपा में भी बागी कार्यकर्ता चुनाव मैदान में डटे हैं।
दरअसल, नगर निकाय चुनाव को लेकर भाजपा में ऐसे कई कार्यकर्ता थे, जो लंबे समय से टिकट पाने की जुगत में थे। इनमें नगर निगम के 70 वार्डों में पार्षद पद के लिए 400 कार्यकर्ताओं ने दावेदारी की थी। पार्टी ने कई निवर्तमान पार्षदों के भी टिकट काट दिए थे। इसके साथ पांच साल से तैयारी में जुटे कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिले। कुछ तो संतुष्ट होकर पार्टी के साथ ही चुनाव में जुट गए, लेकिन कुछ वार्डों में कार्यकर्ता बागी हो गए, जो पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय के रूप में चुनावी मैदान में उतरे हैं। इन्होंने पार्टी के प्रत्याशियों को समीकरण बिगाड़ रखे हैं। इससे भाजपा को नुकसान हो सकता है। इसी तरह जिले की चार नगर पालिका क्षेत्रों में कुछ सेक्टरों में सभासदों और नगर पंचायतों में सदस्यों पद पर भी निर्दलीय प्रत्याशी अपनी पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
वहीं, ऐसी स्थिति सपा में भी है। कई जगहों पर बागी हुए कार्यकर्ता चुनावी मैदान में है। खासकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ऐसी स्थिति बनी है। इसके अलावा कांग्रेस में कई जगहों पर कार्यकर्ता पार्टी के सिंबल के बजाए निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि इनको पार्टी टिकट भी दे रही थी। बसपा में भी वार्डों व सेक्टरों कुछ जगहों पर रार देखने मिल रही है। हालांकि, पार्टी पदाधिकारी इस पर बोलने को तैयार नहीं है।
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