गांव बिशनपुर में टूटी नाली।
- फोटो : सुबह 10:15 बजे कुछ इस तरह रहा धवन रोड का नजारा।
सहारनपुर। महानगर के वार्ड आठ के गांव बिशनपुर के न तो जिंदा लोगों को नाला, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं न ही मुर्दों को जलाने के लिए श्मशान घाट में छतरी है। स्थानीय लोग लंबे समय से इन मांगों को उठा रहे हैं।
बिशनपुर महानगर के उन 32 गांवों में शामिल है, जिनको मिलाकर सहारनपुर नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा दिया गया था। इन 32 गांवों में महानगर में आने के बाद काफी कुछ काम हुए हैं, लेकिन कुछ गांव और समस्याएं ऐसी हैं, जो आज भी बनी हुई हैं। बिशनपुर पूर्व पार्षद का गांव है। इसके बावजूद नगर निगम ने गांव के विकास पर ध्यान नहीं दिया। गांव में जलनिकासी के लिए पक्का नाला नहीं होने से पानी गांव के बाहर जमा हो रहा है, जो आसपास की नर्सरियों और खेतों में जाकर फसलों और पौधों को नुकसान पहुंंचा रहा है। पानी को लेकर लोगों में कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी है। समस्या लेकर कई बार ग्रामीण नगर निगम आए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके अलावा गांव की गलियां और नालियां भी जर्जर हैं। कचरा गांव के बीच में जमा है, जिसका उठान नहीं हो रहा है।
स्थानीय लोगों की पीड़ा
-अमरनाथ ने बताया कि पक्का नाला नहीं होने की वजह से पूरे गांव का पानी उनके खेत में जा रहा है। दो बार गुलाब की नर्सरी खराब हो चुकी है। एक बार धान की और इस बार गेहूं की फसल खराब हुई है।
-रवि कपिल का कहना है कि उनकी नर्सरी गांव से सटी हुई है, जिसकी बगल से गांव का पानी गुजरता है। नाला कच्चा होने की वजह से कई बार पानी नर्सरी में घुसकर लाखों रुपये के पौधे खराब कर चुका है।
-विनय कुमार का कहना है कि श्मशान घाट बदहाल है। श्मशान में ना तो छतरी बनी हुई है और ना ही श्मशान को जाने वाला मार्ग पक्का है। कहने को महानगर में शामिल हुए हैं, हालत पहले जैसी ही है।
गांव बिशनपुर में टूटी नाली। - फोटो : सुबह 10:15 बजे कुछ इस तरह रहा धवन रोड का नजारा।