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नजूल की करोड़ों रुपये कीमत की संपत्तियों पर कब्जे

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नजूल की करोड़ों रुपये कीमत की संपत्तियों पर कब्जे
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सहारनपुर। नजूल की करोड़ों रुपये कीमत की संपत्तियों पर कब्जे हैं। नगर निगम द्वारा नोटिस जारी करने के बाद भी राजनीतिक संरक्षण की वजह से कब्जे नहीं हट रहे हैं। ऐसे में नगर निगम अधिकारियों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पीपी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराकर बेदखली की कार्रवाई करने की मांग की है।
शहर के घंटाघर चौक से कोर्ट रोड ओवरब्रिज तक तथा घंटाघर से ही रेलवे रोड पर रेलवे स्टेशन तक नजूल की अनेक संपत्तियां हैं, जिनकी मौजूदा कीमत एक लाख रुपये प्रति गज से भी अधिक है। हालांकि सर्किल रेट इससे थोड़ा कम है। यही वजह है कि पट्टा सीमा समाप्त होने के बाद भी लोग उक्त संपत्तियों से कब्जा नहीं छोड़ रहे हैं। इसके लिए राजनीतिक ताकत का भी इस्तेमाल कर अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। जिन लोगों की पट्टा अवधि समाप्त हो चुकी है, उनको नगर निगम ने नोटिस जारी कर संपत्तियां खाली करने को कहा था। मगर कब्जाधारी संपत्तियों को खाली नहीं कर रहे हैं। इस संबंध में कब्जाधारियों को 16 जनवरी 2021 को कारण बताओ नोटिस तक जारी किए गए, मगर संपत्तियां खाली नहीं की गई हैं, बल्कि संपत्तियों में फेरबदल किए जा रहे हैं। तीन जुलाई 2021 को ही नगर निगम ने जिलाधिकारी अखिलेश सिंह को पत्र लिखकर अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध पीपी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर संपत्तियों को कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
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पुराने भवन तोड़कर बना दी दुकानें
रेलवे रोड स्थित करीब 600 गज का भूखंड इन दिनों चर्चाओं में है। मामले में एक पार्षद ने भी शिकायत की है। चर्चा है कि भूखंड पर कब्जाधारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिस वजह से अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं। करीब छह माह पहले भी कोर्ट रोड स्थित नजूल की जमीन पर एक नेता द्वारा व्यावसायिक निर्माण कराया गया। उससे पहले भी नजूल की कई संपत्तियों पर पुराने भवन तोड़कर व्यवसायिक निर्माण किए जा चुके हैं। रेलवे रोड पर ही एक संपत्ति पर होटल तैयार कर लिया गया।
बोर्ड बैठकों में हो चुके हैं हंगामे
नजूल की जमीनों पर कब्जे और निर्माणों को लेकर नगर निगम बोर्ड की बैठकों में हंगामा होता रहा है। कुछ समय पहले पार्षद अभिषेक अरोड़ा उर्फ टिंकू और अन्य पार्षदों ने बोर्ड बैठक में हंगामा करते हुए सत्ताधारी नेता पर कब्जा करने का आरोप लगाया था। उन्होंने मामले की शिकायत मंडलायुक्त से करने तथा धरने पर बैठने की चेतावनी दी थी, मगर समय के साथ मामला दब गया।
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नजूल की अनेक संपत्तियों की पट्टा अवधि समाप्त हो चुकी है। कब्जाधारियों को कई बार नोटिस जारी कर कब्जे छोड़ने को कहा जा चुका है, मगर मनमाने तरीके से जमे हुए हैं। उक्त कब्जाधारियों पर पीपी एक्ट के तहत कार्रवाई करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है।
-- अशोक प्रिय गौतम, सहायक नगरायुक्त
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