पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विख्यात सिद्धपीठ शाकंभरी देवी में मां का भवन चैत्र माह के प्रथम नवरात्र मेले पर श्रद्धालुओं के जयकारों से गुंजायमान रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।
बुधवार को सुबह से ही लेटकर एवं पदयात्रियों के श्रद्धालुओं का काफिला प्राचीन सिद्धपीठ शाकंभरी देवी पहुंचना शुरू हो गया था। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सर्वप्रथम बाबा भूरादेव के दर्शन करने के बाद भक्तों ने सिद्धपीठ पहुंचकर आस्था एवं श्रद्धा के साथ कतार में लगकर मां के दर्शन किए। सभी वाहनों को पुलिस द्वारा भूरादेव मंदिर से पूर्व शाकंभरी खोल में ही रोका जा रहा था। वहां से भक्त पैदल ही मां के दर्शनों को जा रहे थे। हालांकि पहला नवरात्र होने के चलते सिद्धपीठ में भारी भीड़ उमड़ने का अनुमान था लेकिन, श्रद्धालुओं की अपेक्षित भीड़ नहीं पहुंच पाई।
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भूरादेव से सिद्धपीठ तक लेटकर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी कम नहीं थी। कंकरीले-पथरीले मार्ग पर चलते हुए भक्तों की आस्था देखते ही बन रही थी। सिद्धपीठ स्थित शंकराचार्य आश्रम में भी श्रद्धालुओं ने संत सहजानंद ब्रह्मचारी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
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इसके अलावा रक्तदंतिका मंदिर, दद्दा आश्रम, संकटमोचन हनुमान मंदिर, साकेश्वर मंदिर, शिवालिक पहाड़ियों के मध्य स्थित सिद्धपीठ से पांच किलोमीटर दूर सहंस्रा ठाकुर मंदिर पर भी श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना कर शीश नवाया।