सहारनपुर। सांसद इमरान मसूद ने रेलवे में हो रहे निजीकरण के संबंध में लोकसभा में नियम 377 के तहत नोटिस दिया है। नोटिस को स्वीकार कर सदन के पटल पर रखा गया है।
नोटिस ने उन्होंने कहा कि रेलवे में निजीकरण के चलते ठेकेदार कर्मियों का शोषण कर रहे हैं। सहारनपुर से गोमतीनगर तक चलने वाले वंदे भारत एक्सप्रेस में उन्होंने स्वयं सफर किया। उन्होंने देखा कि कर्मचारियों को तीन से चार घंटे की ही नींद मिलती है। ट्रेन में ठेकेदारों द्वारा सफाई कर्मियों और अन्य स्टाफ से 18 घंटे तक कार्य लिया जा रहा है। इसके बदले में उन्हें दस से 12 हजार तक का वेतन मिल रहा है। उन्हें कोई छुट्टी भी नहीं दी जाती। यदि कर्मी छुट्टी करता है तो उस दिन का वेतन काट लिया जाता है।
निजीकरण के कारण सभी गाड़ियों में यही हाल है। सरकार ने जो कानून बनाएं, उनका पालन नहीं हो रहा है। श्रम कानून को आसान और कारगर बनाने के लिए चार श्रम संहिताओं को लागू किया, जिसमें स्थायी कर्मियों के बराबर सभी लाभ प्राप्त होंगे। नए प्रावधान अधिकतर क्षेत्रों में आठ से 12 घंटे प्रतिदिन अधिकतम 48 घंटे सप्ताह तक ही काम लिया जा सकता है। इससे अधिक काम लेने के लिए कर्मचारी की सहमति के बाद कम से कम दोगुना ओवर टाइम देना अनिवार्य होगा।