नानौता, चिलकाना। शिया समुदाय द्वारा मुहर्रम की छह तारीख को कर्बला के 72 शहीदों की याद में मातमी जुलूस निकाला गया। मातमी जुलूस में इमामबारगाह से अलम और अली रजा के घर से जुलजुनाह बरामद की गई। मातमी जुलूस में नगर की चारों अंजुमनों के शिया सोगावरो ने नौहा ख्वानी करते हुए सीनाजनी की।
नानौता में जुलूस से पूर्व इमामबारगाह छत्ता में मजलिस के दौरान खिताब करते हुए मौलाना मेहंदी बाकर खान जौनपुरी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने जो कुर्बानी कर्बला के मैदान में दी, उसे शिया सोगवार कयामत तक याद करते रहेंगे। मजलिस के दौरान कर्बला के शहीदों की शहादत का वाक्या सुनकर शिया सोगवारों की आंखों से आंसू बहने लगे और माहौल गमगीन हो गया। मजलिस के बाद कोर्ट स्थित इमामबारगाह दरबार ए हुसैन से अलम बरामद करते हुए मातमी जुलूस शुरू किया गया। जुलजुनाह अली रजा के घर से बरामद की गई। मातमी जुलूस नगर की इमामबारगाह महल से होते हुए इमामबारगाह सब्जवारयान पर जाकर संपन्न हुआ। मातमी जुलूस में नगर की चारों अंजुमनों अंजुमन सरकार ए आबूतालिब, अंजुमन ए हुसैनियां, अंजुमन ए हैदरी, अंजुमन जुल्फिकार ए हैदरी के सोगवारों ने नौहाखाववानी की गई। मातमी जुलूस में मौलाना हिदायत हुसैन, आमिर हैदर जैदी, मोहम्मद शब्बर हुसैन, मोहम्मद अली मियां, मोहम्मद मियां आब्दी आदि शिया सोगवारों ने सीनाजनी करते हुए मातम किया।
चिलकाना में मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मोहम्मद अब्बास बाकरी ने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने 18 साल के जवान बेटे जनाबे अली अकबर की कुर्बानी देकर दुनिया को बताया कि जुल्म के खिलाफ लड़ाई लड़ो। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का मिशन था कि दुनिया से जुल्म को खत्म किया जाए और दुनिया को इंसाफ मिले। इसलिए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने जालिम बादशाह यजीद इब्ने माविया से जंग की और अपने 72 साथियों सहित अल्लाह की राह में शहीद हो गए। इस दौरान मरसिया खानी जैनुल आबेदीन, हुसैन इमाम ने की। सोगवार मूसा इमाम, अली, इमाम, तहरीर अब्बास नकवी, अलीशान, रेहान, तारिफ हुसैन, मुसर्रत हुसैन, काजिम, कमर अब्बास, समर अब्बास, शिजा नकवी मौजूद रहे।