सहारनपुर में जमीयत दावातुल मुसलीमीन के सरबराह व महरूफ़ आलिम क़ारी इसहाक़ गोरा की अगुवाई में चलाई जा रही रोजेदारों के लिए हेल्पलाइन पर बुधवार को रोजेदारों ने अपनी शंकाओं का समाधान किया। जवाब शरीयत की रोशनी में हवालों के साथ दिए गए।
सवाल ः नकुड़ शाइस्ता बेग ने पूछा की रोजे की हालत में सुरमा लगा लिया जिसका असर हलक़ में महसूस हो रहा है। ऐसी सूरत में मेरा रोजा सलामत रहा है?
जवाब ः शरीयत में आया है कि आँखों में सुरमा लगाने से रोजा नही टूटा, तब भी रोजा नहीं टूटेगा चाहे सुरमा डालने का असर थूक में या नाक के बांसे में महसूस हो रहा हो।
सवाल ः मुजफ्फरनगर की हुमा सिद्दीक़ी ने मालूम किया कि मेरा पांच माह का बालक है जो मेरा दूध पीता है। परंतु जब में रोजे में होती हूं दूध नहीं उतरता है। इस तरह बेटे की तबियत पर काफ़ी असर पड़ता जा रहा है।
जवाब ः शरीयत में आया है कि अगर कोई महिला बच्चे को दूध पिला रही हो, चाहे बच्चा उसका हो या दूसरे का, उजरत पर पिला रही हो या बिना उजरत के, इसके लिए रोजा छोड़ने की इजाजत है। परन्तु ये देख लेना चाहिए कि रोजे की हालत में बच्चे या दूध पिलाने वाली की तबियत मुस्तसिर हो रही या नहीं। अगर हो रही है तो रोजा छोड़ने की इजाजत है। पर हाँ! बाद में क़जा करनी होगी।
सवाल ः गंगोह से फ़ैसल सलमानी ने पूछा कि मैने सहरी में बिरयानी खाई थी। सुबह मुझे महसूस हुआ मांस का अंश मेरे दांतों में फंसा था मैंने उसको निगल लिया। तो क्या रोजा नहीं रहा है।
जवाब ः शरीयत में है कि अगर किसी व्यक्ति के दांतों में मांस, रोटी वगैरह का अंश लगा हो और दांतों से निकले बिना निगल लिया तो रोजा टूट जाएगा। पर अगर किसी ने मुंह से बाहर निकाला फिर निगला तो अब ये अंश चने के बराबर हो या न हो, हर हालत में रोजा ख़त्म हो जाएगा।
रोजेदार दोपहर 1:00 से शाम 5:00 बजे तक इन नम्बरों पर 9897399207 व 8954778592 व 9557757705 व 9368399214 सवालों के जवाब जान सकते हैं।