सहारनपुर में विधान सभा चुनावों के नतीजों ने साफ कर दिया कि सहारनपुर की जनता पर लोकसभा चुनाव के दौरान छाया मोदी का जादू अब तक कायम है। यही वजह रही कि बसपा का सुपड़ा साफ करते हुए जिले की चार सीटों पर कमल खिल गया।
इससे पहले रामलहर में वर्ष 1993 के विधान सभा चुनावों में सहारनपुर में पांच सीटें भाजपा के खाते में आई थी। इसके बाद यहां हुए चुनावों में 2002 में तो खाता तक नहीं खुल सका था।
तीन साल पूर्व हुए लोकसभा चुनाव में जिले में चला मोदी का जलवा विधान सभा चुनाव में भी साफ दिखाई दिया और भाजपा पांच साल में फर्श से अर्श पर पहुंच गई।
सहारनपुर जनपद को पांच साल पूर्व तक भाजपा के लिए मुफीद नहीं माना जाता था। भाजपा की बात करें तो केवल रामलहर के दौरान ही यहां भगवा परचम लहराया था।
उस वक्त वर्ष 1993 के विधान सभा चुनावों में नागल से डा. मामचंद लांबा, देवबंद से शशिबाला पुंडीर, हरोड़ा से मोहर सिंह और सहारनपुर से लाजकिशन गांधी भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत गए थे।
इसके बाद वर्ष 1996 में दो सीटों देवबंद से सुखबीर सिंह पुंडीर और सरसावा से निर्भयपाल शर्मा भाजपा से चुनाव जीते थे। वर्ष 2002 में तो भाजपा का जिले में खाता ही नहीं खुला था।
जबकि वर्ष 2007 में केवल सहारनपुर नगर राघव लखनपाल शर्मा, वर्ष 2012 में फिर नगर से राघव लखनपाल शर्मा ही खाता खोलने में सफल रहे थे। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव आते आते जिले में राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदली और मोदी का जादू यहां के लोगों के सिर चढ़कर बोला।
इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी पांच विधान सभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर रहे थे। उन्हें गंगोह क्षेत्र से एक लाख 27 हजार 82, नकुड़ से एक लाख आठ हजार 583, रामपुर मनिहारान सीट से 86 हजार 645, देवबंद से एक लाख चार हजार 51, सहारनपुर नगर से एक लाख 33 हजार 577 वोट मिले थे।
लोकसभा के इस परिणाम को विधान सभा चुनाव के परिणामों में तब्दील करने में मोदी लहर कामयाब रही है। राजनीतिक विशलेषक इसे बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं।