उधर, यूपी अल्पसंख्यक आयोग ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए संस्था के शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर 21 जून तक जवाब-तलब किया है।
राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग (एनसीपीसीआर) का पत्र प्राप्त होने के बाद एसडीएम देवबंद को दारुल उलूम भेजा गया था। इस संबंध में संस्था की ओर से मोहतमिम ने अपना पक्ष रखा है। बताया गया है कि बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उनका पाबंदी का उद्देश्य केवल इतना था कि संस्था का पाठ्यक्रम प्रभावित न हो। इस संबंध में आज संस्था का शिक्षा विभाग लिखित में जवाब प्रस्तुत करेगा। - डॉ. दिनेश चंद्र, डीएम सहारनपुर
संस्था किसी भाषा की विरोधी नहीं : मोहतमिम
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने वीडियो के जरिये प्रशासन को भेजे स्पष्टीकरण में कहा कि संस्था किसी भाषा की विरोधी नहीं है। संस्था ने अपना-अलग अंग्रेजी और कंप्यूटर विभाग स्थापित किया हुआ है, जहां छात्रों को शिक्षा दी जाती है।
केवल संस्था के छात्रावास में रहकर छात्रों द्वारा बाहर कोचिंग और कारोबारी गतिविधियों में शामिल होने पर रोक लगाई गई है, ताकि छात्र अपना पूरा समय संस्था के पाठ्यक्रम में ही लगा सकें। इदारे का प्राइमरी सेक्शन छात्रों को अंग्रेजी, गणित और विज्ञान की शिक्षा देता है।