सरसावा। सहकारी चीनी मिल संघ के घाटे का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार ने चीनी मिल अधिकारियों और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर रोक दिया है। इसके विरोध में मिल कर्मचारियों ने प्रधान प्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर दीपावली को काला दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है।
बृहस्पतिवार को किसान सहकारी चीनी मिल के कर्मचारी और अधिकारी प्रधान प्रबंधक दीप्ति देव यादव से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। चीनी मिल कर्मियों ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चीनी मिल संघ के घाटे का उल्लेख कर माह जुलाई 2021 में तीन प्रतिशत, माह जनवरी 2022 में तीन प्रतिशत तथा अक्तूबर 2022 में चार प्रतिशत महंगाई भत्ते पर रोक लगा दी गई है, जो चीनी मिल अधिकारी और कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात है। चीनी मिल कर्मियों ने कहा कि कोरोना काल में भी मिल कर्मी लगातार काम करते रहे, जिसका उन्हें कोई अलग से भत्ता नहीं दिया गया। प्रदेश के कई विभाग घाटे में चल रहे हैं परंतु किसी भी विभाग द्वारा महंगाई भत्ते पर रोक नहीं लगाई गई है।
अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने साफ कहा कि वे इस बार दीपावली न मना कर काला दिवस मनाएंगे। श्रमिक नेता राजवीर सिंह ने कहा कि सहकारी चीनी मिल संघ की स्थापना लाभ या हानि के आधार पर नहीं बल्कि किसानों के हितों के लिए की गई है जिसका प्रमाण ये है कि सहकारी चीनी मिलों में पेराई सत्र के दौरान गन्ने की उपलब्धता के आधार पर गन्ने में परता न होते हुए भी चीनी मिलें जून तक चलाई जाती हैं, जबकि निजी चीनी मिलें अप्रैल माह में बंद हो जाती हैं।
नानौता में ज्ञापन सौंपा
नानौता में भी चीनी मिल कर्मचारियों ने सरकार के निर्णय के खिलाफ ज्ञापन मिल के जीएम ललित कुमार को सौंपा। ज्ञापन देने वालों में उप प्रबंधक ईडीपी राजेश वग्षेम, मुख्य रसायनविद दिलीप कुमार सोलंकी, अमलेश कुमार, मोहम्मद अली, अख्तर सिद्दीकी, रणजीत सिंह, घनश्याम कुमार, चंद्रपाल सिंह, मोहित त्यागी, प्रशांत शर्मा आदि रहे।