-स्वास्थ्य विभाग को खुद खरीदनी पड़ेगी दवा, शासन ने दिए निर्देश
-जिले में टीबी के पांच हजार से अधिक मरीज, 250 एमडीआर के शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। टीबी के एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंट) मरीजों की दवा खत्म हो गई है। जिसकी वजह से खतरा बढ़ गया है। एमडीआर के जो मरीज गरीब तबके के हैं, उनके लिए महंगी दवाइयां खरीदना मुश्किल हो जाता है। उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। शासन ने निर्देश दिए कि विभाग को स्थानीय स्तर पर दवाइयों की खरीदारी करें।
जिले में टीबी के पांच हजार से अधिक मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें से एमडीआर के करीब 250 मरीज हैं। इन्हें दी जाने वाली साइक्लोसेरिन कैप्सूल, लिनेजोलिड की गोलियां क्षय रोग विभाग में खत्म हो गई है। पिछले दिनों शासन स्तर से निर्देश दिए गए थे कि इन दवाइयों की खरीदारी जल्द से जल्द स्थानीय स्तर पर ही की जाए, लेकिन अभी इनकी खरीदारी नहीं हो पाई है। एमडीआर मरीजों को दो साल तक दवा खानी पड़ती है। जब जाकर ही वह टीबी को मात दे सकते हैं।
खासी अहम होती है खत्म हुई दवा
जो दवा खत्म हुई हैं, वह टीबी रोग में खासी अहम मानी जाती हैं। दवा नहीं होने से मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही। क्योंकि ऐसे मरीजों को दो साल तक लगातार दवा खानी पड़ती है। अगर एक दिन भी दवा नहीं ली गई तो फिर से छह माह का कोर्स पूरा करना होगा।
12 हजार गोलियों की डिमांड भेज दी
जिला क्षय रोग अधिकारी सर्वेश सिंह ने बताया कि उनके स्टॉक में एमडीआर मरीजों की दवाई खत्म है। स्वयं ही दवाइयों की खरीदारी करनी है, इसलिए गुजरात की कंपनी को 12 हजार साइक्लोसेरिन कैप्सूल 250 एमजी, लिनेजोलिड 600 एमजी की डिमांड भेज दी है। जिनकी कीमत लगभग 1.62 लाख रुपये है। दवाइयां अगले सप्ताह तक पहुंच जाएगी।