वायरल लेटर के संबंध में बृहस्पतिवार को दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी की और से बयान जारी किया गया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि मुफ्ती तकी उस्मानी के नाम से संस्था के लेटर पैड पर जो अपील सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उससे उनका या संस्था का कोई वास्ता नहीं है। फर्जी हस्ताक्षर व संस्था की मुहर को स्कैन कर लेटर पैड का गलत इस्तेमाल करने वाले के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी।
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अमेरिका ने 2008 में किया था गिरफ्तार
वर्ष 2004 में अमेरिका ने पाकिस्तानी साइंटिस्ट डॉ. आफिया सिद्दीकी का लिंक अलकायदा से जोड़ा और 2008 में उन्हें अफगानिस्तान में गिरफ्तार कर लिया था। इसके दो वर्ष बाद आफिया को 86 साल की जेल की सजा सुनाई गई। जिसका पाकिस्तान कड़ा विरोध कर रहा है।