सहारनपुर। जैन बाग स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन श्रीजी का मंगल अभिषेक और शांतिधारा की गई। जैन समाज के लोगों ने श्रद्धाभाव से पूजा अर्चना की। इस मौके पर आचार्य ज्ञेय सागर महाराज ने कहा कि मान का परिहार करना मार्दव धर्म कहलाता है।
श्रीजी का अभिषेक करने का सौभाग्य रवि जैन, बालेश जैन, वैभव जैन, विनोद जैन को मिला। इसके बाद नित्य नियम पूजा के साथ उत्तम मार्दव धर्म की आराधना की गई। आचार्य ज्ञेय सागर महाराज ने कहा कि पर्वाधिराज पर्व का दूसरा धर्म मार्दव धर्म है। मृदुता का जो भाव है, उसको मार्दव कहते हैं। संसार में जीव अपनी किंचित मिथ्या उपलब्धियों का अहंकार करते दिखते हैं। किसी को रूप, किसी को धन, किसी को वैभव, किसी को जाति व किसी को कुल का मद होता है। मनुष्य को मन चिंतन मनन में लगाना चाहिए। प्रबल पुरुषार्थ कर अपना आत्म-हित कर भव भ्रमण का अंत हो, ऐसा सम्यक पुरुषार्थ करना चाहिए। ज्ञात सागर महाराज ने कहा कि गुणीजनों के प्रति मन, वचन, कार्य से समर्पित होना ही मार्दव धर्म है। जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने आगम में रेखांकित प्रसंग की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ध्यानस्थ मुनिराज बाहुबली के चरणों में भरत चक्रवती ने पूजन किया, तब बाहुबली ने निज ध्यान में स्थिर होकर ज्ञान प्राप्त किया, जिन्होंने भेद-ज्ञान के द्वारा संपूर्ण जगत को अपने से भिन्न जाना है। गुणीजनों की विनय करना मार्दव धर्म है। हमें आत्म-कल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए उत्तम मार्दव धर्म की आराधना करनी चाहिए। जबलपुर से आए पीयूष भैया ने भी विचार रखे। इस दौरान नवीन जैन, अनिल जैन, चौधरी अनुज जैन, दीपक जैन, प्रकाम जैन, अजय जैन, नीरज जैन, सत्यपाल जैन, संजय जैन, अंकुर जैन, संदीप जैन, अशोक जैन, विपिन जैन, प्रदीप जैन, संयम जैन आदि मौजूद रहे।