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आम निर्यात को लगा झटका, ढाई गुना कम हुआ आम का निर्यात

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आम निर्यात को लगा झटका, ढाई गुना हुआ कम
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सहारनपुर। कोरोना महामारी की मार आम के निर्यात पर भी पड़ी है। गत वर्ष की तुलना में आम के निर्यात में ढाई गुना से अधिक की कमी आई है। पिछले वर्ष मंडी समिति परिसर स्थित मैंगो पैक हाउस से जहां 727895 किलो आम का निर्यात हुआ था, वहीं इस बार घटकर 268001 किलो ही रह गया। इस वर्ष सिर्फ इटली, यूके और नेपाल ही आम भेजा गया है।
अपनी खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर जनपद के आम के निर्यात को इस बार तगड़ा झटका लगा है। सीजन में आम का आयात करने वाले अधिकांश देशों में लॉकडाउन जैसे हालात थे। इसके चलते इस बार वहां आम नहीं भेजा जा सका। जनपद से आम का निर्यात सिर्फ तीन ही देशों को किया गया। इनमें इटली में 24445 किलो, यूके में 16421 किलो और नेपाल में 227135 किलो आम भेजा गया है।
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मंडी सचिव अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि इस बार कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते कम निर्यात हुआ है। कोरोना का असर वैश्विक है। आम के सीजन में अधिकांश देशों में लॉकडाउन जैसे हालात थे। साथ ही बारिश के बाद फफूंदी का प्रकोप होने से आम में कालापन भी आ गया था। इस बार निर्यातक भी कम आए हैं। इससे मौजूदा सीजन में आम का निर्यात मात्र 268001 किलो ही हुआ है। जबकि गत सीजन में आम का निर्यात 727895 किलो था।
आम के निर्यात पर मिलता है अनुदान
उत्तर प्रदेश मंडी परिषद आम के निर्यात पर निर्यातक और उत्पादक दोनों को अनुदान देती है। साथ ही परिवहन भाड़ा पर भी सब्सिडी देती है। परिषद आम के नवाब ब्रांड के प्रमोशन के लिए निर्यातक को दस रुपये प्रति किलो और उत्पादक को छह रुपये प्रति किलो की दर से अनुदान देती है। इसके अलावा हवाई एवं समुद्री मार्ग से निर्यात करने पर 15 रुपये प्रति किलो और सड़क मार्ग से निर्यात करने पर साढे़ सात रुपये प्रति किलो की दर से अनुदान दिया जाता है।
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इन देशों को होता है आम का निर्यात
मैंगो पैक हाउस पर प्रोसेस होकर कई देशों को आम का निर्यात किया जाता है। इनमें इटली, यूनाईटेड किंगडम, अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया, नेपाल, स्वीडन, फ्रांस, दक्षिण कोरिया आदि देश शामिल हैं।
इन प्रजातियों की अधिक मांग
विदेशों में आम की कई प्रजातियों को पसंद किया जाता है। इसमें दशहरी, चौसा, लंगड़ा, कलमी, रामकेला, अल्फांसो, केसर, राजापुरी आदि शामिल हैं।
एक नजर में आम का निर्यात
वर्ष -------------------- निर्यात
2018 ----------------- 361595 किलो
2019 ----------------- 727895 किलो
2020 ----------------- 268001 किलो
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