देवबंद। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पूर्व प्रवक्ता व प्रसिद्ध आलिम मौलाना खलील रहमान सज्जाद नोमानी ने कहा कि आजादी में मदरसों विशेषकर देवबंदी उलमा की मुख्य भूमिका रही है। उन्होंने आजादी के बाद भी देश के विकास और तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
बृहस्पतिवार की रात्रि दारुल उलूम वक्फ की अतिबुल मस्जिद में आयोजित इस्लाही मुआशरा (समाज सुधार) कार्यक्रम में पहुंचे मौलाना सज्जाद नोमानी ने उलमा की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए छात्रों को नसीहत करते हुए कहा कि उन्हें बुजुर्गों के नक्शे कदम पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालात से घबराने या मायूस होने की जरूरत नहीं है। सरजमीन-ए-देवबंद ने हमेशा नाजुक वक्त में हालात को संभाला है। मौलाना सज्जाद ने छात्रों से नेक बनकर ईमानदारी के रास्ते पर चलने का आह्वान किया। इसमें संस्था के मोहतमिम मौलाना सूफियान कासमी, मौलाना शकेब कासमी, मौलाना दिलशाद कासमी, मुफ्ती अहसान, मौलाना शाहिद, मौलाना इजहार, मौलाना सिकंदर, मौलाना नौशाद नूरी आदि मौजूद रहे।