सहारनपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर ज्योतिषाचार्यों की राय है कि बीमार व्यक्ति को छोड़कर सभी व्रत का पालन कर सकते हैं। विधिपूर्वक भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। जन्माष्टमी पर चंद्र उदय रात्रि 11: 37 बजे होगा।
सिद्धपीठ श्री शिव बगलामुखी मंदिर ब्रह्मपुरी कॉलोनी के अधिष्ठाता व आचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि नक्षत्र और पंचांग के हिसाब से मंगलवार को ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष संयोग है। हर बार लोग दो दिन जन्माष्टमी होने की वजह से संशय में रहते हैं। मंगलवार को जन्माष्टमी मनाना उत्तम होगा और व्रत रखना सभी के लिए फलदायी होगा। सुबह के समय व्रत का संकल्प करें और रात्रि में चंद्रोदय होने पर पूजा करें। कान्हा जी के साथ उनके माता-पिता श्री वासुदेव-देवकी, नंदबाबा और यशोदा जी को प्रणाम कर ही भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। दूध, दही, घी शहद, शक्कर से पंचामृत बनाकर स्नान कराकर गंगाजल से स्नान कराएं। रात में घर के पास स्थित मंदिर में जाकर भगवान श्रीकृष्ण को पांच पीले फूल और दो फल अर्पित करें और प्रभु श्रीकृष्ण के प्रिय मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जाप करें। इससे पूर्व दिन में उनका पंचामृत से स्नान कराएं। इससे वर्ष भर प्रभु की कृपा भक्त पर बनी रहेगी।
बेहट रोड स्थित श्री बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज ने बताया कि प्रभु श्रीकृष्ण को सुुंदर वस्त्र पहनाकर चंदन का तिलक करें। तुलसी पत्र व पुष्प अर्पित करें। धूप एवं दीपक दिखाएं और भोग लगाएं। भोग में पेड़ा, लड्डू, मक्खन, मिश्री के अलावा सूखे धनिए को भूनकर और पीसकर उसमें बुरा मिलाकर भोग लगाकर आरती उतारें।
पंडित योगेश दीक्षित ने बताया कि प्रभु श्री कृष्ण के जन्म के समय अष्टमी या रोहिणी नक्षत्र में से एक का होना आवश्यक है। इस बार रोहिणी नक्षत्र 13 अगस्त को है, लेकिन अष्टमी तिथि मंगलवार से शुरू हो रही है। सुबह प्रात: 9:07 से अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी, जो 12 अगस्त को प्रात: 11:17 तक रहेगी। इसलिए मंगलवार को ही जन्माष्टमी मनाएं।
श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता व ज्योतिषाचार्य आचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ।- फोटो : SAHARANPUR
श्री बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज।- फोटो : SAHARANPUR