नानौली गांव में सोमवार शाम चाट खाने के बाद 50 से अधिक महिलाओं और बच्चों की हालत बिगड़ गई। फूड प्वाइजनिंग के चलते उल्टी, दस्तों से पीड़ित इन बीमार बच्चों और महिलाओं को परिजन आनन-फानन में अस्पताल लेकर गए। जहां उनका उपचार किया गया। जिला अस्पताल में भर्ती बीमार बच्चों और महिलाओं की संख्या करीब 12-13 बताई गई है, जिनकी दोपहर बाद हालत में सुधार होने के डिस्चार्ज कर दिया गया।
नानौली गांव में सांय करीब पांच बजे एक चाट विक्रेता पहुंचा। गांव के महिलाओं बच्चों ने उससे चाट लेकर खाई। रात के करीब सात बजे चाट खाने वाले सभी महिलाओं बच्चों के सिर में दर्द और बदन में बेचैनी होने लगी। इसके बाद उन्हें उल्टी-दस्त शुरू हो गए। एक साथ 50 से अधिक महिलाओं और बच्चों को उल्टी, दस्त होने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।
परिजन बीमार महिलाओं और बच्चों को आनन-फानन में आसपास के प्राईवेट चिकित्सकों के पास लेकर गए। उन्होंने प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन जब हालत सुधरने की बजाय और अधिक बिगड़ने लगी तो सभी को जिला अस्पताल ले जाने के लिए 108 पर फोन किया गया। काफी देर तक भी एंबुलेंस नहीं आई तो ग्रामीण बीमार लोगों को प्राईवेट वाहनों से अस्पताल ले गए। करीब 12-13 महिला और बच्चे रात में ही जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए। बाकी ने प्राईवेट अस्पतालों में उपचार कराया। ग्रामीण अल्ताफ, आलिम, रिजवान और महफूज आदि ने बताया कि जिन बच्चों और महिलाओं ने चाट खाई थी, वे सभी उल्टी दस्त से पीड़ित हैं।
चाट खाने के बाद इनकी बिगड़ी हालत
इकराम 38, गुफराना 45, मुकर्रम 5, मरियम 3, शादाब, 12, मुस्तकीम, शमीना, शुभाना, इसराना (16) पुत्री शकील, शबाना (10) पुत्री शकील, अफसाना (20) पत्नी बिलाल, इसरान (4) पुत्र कयूम, काली (7) पुत्री कयूम, रिहाना (30) पत्नी कयूम, अमरीश (8) पुत्री शौकत, रईस (5) पुत्र शौकत, सोनू (3) व सलमान (5) पुत्रगण रिजवान, शाइबा (6), हुस्नजहां (11), सबिया (4) व शबनम पुत्रियां इसरार आदि 50 से अधिक महिलाएं और बच्चों ने चाट खाया, जिसके बाद फूड प्वाइनिंग के चलते उनकी हालत बिगड़ी।
44 किमी. दूर है प्राथमिक चिकित्सा सेवा
बेहट। यमुना खादर क्षेत्र के गांवों के लोगों के लिए आपातकाल चिकित्सा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है। नानौली गांव में चाट खाने से सोमवार की रात 50 से अधिक महिलाओं और बच्चों की हालत बिगड़ने पर ग्रामीणों के हाथ-पांव फूल गए। बीमारों को प्राथमिक उपचार देने के लिए आसपास कोई व्यवस्था नहीं थी। ग्रामीणों को मजबूरी में कुछ प्राईवेट चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ा, लेकिन उनके द्वारा दिए गए उपचार से बीमारों को कोई रिलीफ नहीं मिल सका, जिसके बाद ग्रामीणों को बीमार बच्चों और महिलाओं को लेकर 44 किमी का लंबा सफर तय करके जिला अस्पताल भागना पड़ा।
हालांकि नानौली 8 किमी दूर कम्बोहमजरा गांव है, जहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित है, मगर यहां स्टॉफ की तैनाती नहीं है। केवल एक फार्मेसिस्ट की तैनाती है। आरोप है कि वह भी सप्ताह में एकाध बार आता है। इस केंद्र पर ज्यादातर ताला लटका रहता है। दूसरे 13 किमी दूर साढ़ौली कदीम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। लंबे समय से इसकी बिल्डिंग निर्माणाधीन होने के चलते यहां भी ग्रामीणों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। 18 किमी बेहट सीएचसी स्थित है। यहां भी स्टॉफ की कमी के कारण चिकित्सा सुविधाओं का टोटा है।
तीन हजार की आबादी है नानौली में
बेहट। विकासखंड साढ़ौली कदीम क्षेत्र का नानौली गांव यमुना खादर में स्थित है। लगभग तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में गंदगी का साम्राज्य है। गांव के मेन रास्ते पर ही जलभराव हुआ है। गंदा और कीचड़ युक्त पानी के सड़क पर तालाब की तरह भरे रहने से इसमें मच्छरों की भरमार है। ग्रामीणों का कहना है कि सोमवार की रात फूड प्वाइजनिंग के चलते उनके लाड़लों की जान पर बन आई। उन्हें डर है कि कहीं गंदगी के चलते उनके गांव में संक्रामक रोग न फैल जाए। ग्रामीणों ने गांव में सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।