स्टार पेपर मिल में तीसरे दिन भी तेंदुआ की दहशत रही। इसी दहशत के बीच रविवार को मिल में बीएसडब्ल्यू यूनिट को छोड़ बाकी यूनिटों में कर्मचारियों से काम कराना शुरू कर दिया गया। बीएसडब्ल्यू यूनिट एरिया में ही पानी की टंकी पर मिल के कुछ कर्मचारियों, आरपीएफ के जवान और कुछ अन्य लोगों ने तेंदुआ देखने का दावा किया था।
हालांकि सहारनपुर और देहरादून वन विभाग की रेस्क्यू टीमें तीन दिन के सर्च आपरेशन के बाद भी हमला करने वाले उस जानवर को नहीं पकड़ पाई है जिसे तेंदुआ बताया जा रहा है। वन विभाग की ओर से फिलहाल यही कहा जा रहा सर्च आपरेशन के बाद मिल परिसर में तेंदुआ या इसके जैसा जानवर नहीं मिला है।
एहतियात के तौर पर कुछ टीमें अभी मिल में ही तैनात रहेंगी। मिल के कर्मचारियों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए बड़ा सवाल यही है कि तेंदुआ या उस जैसा जानवर आखिर गया कहां? बता दें कि शनिवार को ही मिल के कुछ कर्मचारियों के अलावा अन्य लोगों ने दावा किया था कि पानी की टंकी के पास दिखने वाला जानवर तेंदुआ ही था।
इसी दावे के कारण रेस्क्यू टीमों के सदस्यों ने रात तक सर्च अभियान तेज किया था। इसके बाद रविवार तक भी कुछ टीमें अंदर खोजबीन करती रही, लेकिन 72 घंटों की मशक्कत के बावजूद टीम के हाथ कुछ नहीं आया। वन विभाग की टीम अब यही मानकर चल रही है कि मिल परिसर में तेंदुआ या उसके जैसा कोई जानवर नहीं है।
विभाग की टीमों के सदस्य अलग-अलग बातें कर रहे हैं। कुछ तेंदुआ की जगह जंगली बिल्ली तो कुछ जंगली कुत्ता या अन्य जानवर के होने की बात कह रहे हैं।
कुत्ते या बिल्ली के हमले से नहीं हो सकती इतनी दहशत
मिल के कुछ कर्मचारी और यहां के आवासों में रह रहे अन्य लोगों का कहना है कि भले ही रेस्क्यू टीमों के हाथ हमलावर जानवर न आया हो लेकिन उसे जंगली बिल्ली या कुत्ता मान लेना भी ठीक नहीं है। उनका कहना है कि किसी कुत्ते या बिल्ली के झपट्टे मारने पर तो अकेला इंसान भी उससे नहीं डरता और उसे भगा देता है।
इसलिए अभी हमला करने वाले जानवर की जांच जारी रखनी चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि कुत्ते और बिल्ली के चक्कर में खतरनाक जानवर ही दोबारा हमला न कर दे। उनका यह भी कहना है कि मिल परिसर से लेकर आसपास की आबादी में कुत्ते तो बड़ी संख्या में घूमते हैं। फिर उनसे किसी को इतनी दहशत क्यों होगी?
जिला वन अधिकारी विजय कुमार का कहना है कि मिल के कर्मचारियों की ओर से तेंदुआ का हमला बताए जाने के बाद से लगातार सर्च आपरेशन चलाया गया है। लगभग पूरा मिल परिसर खंगाला गया।
तेंदुआ या उस जैसा हमलावर जानवर नहीं मिला। पानी की टंकी पर लोगों ने तेंदुआ को देखने का दावा जरूर किया है। काफी खोजबीन के बाद टंकी और आसपास के इलाके में तेंदुआ नहीं मिला। हालांकि मिल परिसर में कई कुत्ते जरूर घूमते मिले हैं।
मिल प्रबंधन को दिलाया भरोसा, डरने की जरूरत नहीं
पेपर मिल प्रबंधन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दो दिन में ही करोड़ों की चपत लगने के बाद रेस्क्यू टीम की ओर से मिल प्रबंधन को भरोसा दिलाया गया है कि कर्मचारियों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। मिल परिसर में खतरनाक जानवर नजर नहीं आया है। वैसे भी उनकी सुरक्षा और निगरानी के लिए कुछ टीमें अभी सक्रिय रहेंगी।
मिल की सिक्योरिटी यूनिट रहेगी अलर्ट ः मिल प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि रेस्क्यू टीम की ओर से मिल परिसर में फिलहाल कोई खतरा नहीं बताया गया है। इस आधार पर कर्मचारियों से काम कराया जा रहा है। हालांकि पानी की टंकी के एरिया वाली बीएसडब्ल्यू प्लांट में कुछ कर्मचारी अभी काम नहीं कर रहे हैं। यहां भी काम शुरू करा लिया जाएगा। सुरक्षा के लिए मिल की सिक्योरिटी यूनिट लगातार निगरानी रखेगी।
काम करेंगे मगर डर नहीं हुआ कम
मिल के कुछ कर्मचारियों ने कहा कि वे काम तो जरूर करेंगे, लेकिन अभी उनका डर कम नहीं हुआ है। इससे उबरने में कुछ वक्त तो जरूर लगेगा। बस भगवान से यही प्रार्थना है कि यहां के कर्मचारियों पर फिर से किसी जानवर का ऐसा हमला न हो।