सहारनपुर में बसपा से टिकट कटने के बाद बागी हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं नकुड़ विधायक डॉ. धर्म सिंह सैनी ने आखिरकार भाजपा का दामन थाम ही लिया। 21 सितंबर को लखनऊ में हुई रैली में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की।
सैनी के भाजपा में जाने के बाद बसपा के पास सहारनपुर में कोई ऐसा चेहरा नहीं बचा है, जिसके दम पर सवा लाख सैनियों के वोटों में सेंध लगाई जा सके। उनके जाने से बसपा को सातों विधानसभा सीटों पर सैनी वोटों का नुकसान हो सकता है।
11 सितंबर को सहारनपुर में हुई मायावती की रैली से कुछ ही दिन पहले डॉ. धर्म सिंह सैनी की भाभी का निधन हो गया था। बसपा से निष्कासित किए गए स्वामी प्रसाद मौर्य डॉ. सैनी के परिवार को सांत्वना देने सहारनपुर पहुंचे थे।
इसकी सूचना बहनजी तक पहुंची थी। माना जा रहा है कि बहनजी इसी बात से नाराज थी। जनपद में रैली होनी थी। ऐसे में रैली से पहले डॉ. सैनी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। रैली के दो दिन बाद ही सैनी को लखनऊ बुलाकर टिकट काटने की जानकारी दी गई।
सैनी ने खुद को बसपा का सच्चा सिपाही बताते हुए बहनजी के समक्ष अपनी सफाई दी और चुनाव लड़ने की इच्छा जताई, मगर बहनजी नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने पार्टी से बगावत कर दी।
लखनऊ से लौटते ही उन्होंने रेलवे स्टेशन से हजारों समर्थकों के साथ रोड शो करते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। एक बैंक्वेट हॉल में हुई सभा में पार्टी छोड़ने का निर्णय ले लिया। सभा के दौरान समर्थकों ने उनको भाजपा में जाने की सलाह दी थी।
उसके बाद से उनके भाजपा में जाने के कयास लगाए जा रहे थे। 21 सितंबर को लखनऊ में हुई भाजपा की रैली में उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली। उनका टिकट काटा जाना और बसपा छोड़ना विस चुनाव में बसपा को नुकसान पहुंचा सकता है।
दरअसल, दलित और मुस्लिमों के बाद जनपद में सबसे अधिक मतदाता सैनी समाज से हैं, जिनकी संख्या सवा लाख से अधिक है। ऐसे में नकुड़ विस के साथ ही बाकी छह सीटों पर भी सैनी वोटर बगावत कर बसपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि बसपाई सैनी समाज का वोट बसपा के साथ होने का दावा कर रहे हैं।