फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खंडहर में तब्दील हुईं कोठियां: लाला चरणदास ने बसाया था कोटा, कभी था वैभव का प्रतीक

Mon, 09 Sep 2024 03:51 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर

सार

वर्तमान में ज्यादातर कोठियां खंडहर में तब्दील हो गईं हैं। कुछ कोठियां सालों से बंद पड़ीं हैं
विज्ञापन
कोटा में बनी हवेली - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सहारनपुर जनपद के मुजफ्फरनगर स्टेट हाईवे पर बसे गांव कोटा की स्थापना करीब 700 वर्ष पूर्व लाला चरणदास ने की थी। मिर्च के कारोबारी चरणदास का परिवार मुफलिसी में राजस्थान के कोटा शहर से रोजी-रोटी की तलाश में यहां आया था। इसी कारण गांव का नाम कोटा पड़ा। बताते हैं कि बुरे वक्त में कोई साधु रोटी मांगने लाला के घर पहुंचा तो उस वक्त घर में खाने को कुछ नहीं था।

विज्ञापन


लाला की माता ने पड़ोस से मांग कर उन्हें रोटी दी थी। जिस पर साधु ने संपन्नता का आशीर्वाद दिया। जो इतना फलीभूत हुआ कि कुछ ही सालों में लाला चरणदास संपन्नता के प्रतीक बन गए। सैकड़ों गांवों में जमींदारा होने के साथ ही अदालत तक उनके यहां लगती थी। उन्होंने अपने लिए महलनुमा कोठियां बनवाई। भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोठी से तालाब तक महिलाओं के स्नान करने जाने के लिए बाकायदा सुरंग तक बनाई गई थी जिसका अस्तित्व आज भी है।

वर्तमान में ज्यादातर कोठियां खंडहर में तब्दील हो गईं हैं। कुछ कोठियां सालों से बंद पड़ीं हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इनमें अभी भी अकूत धन संपदा छिपी हुई है। लक्ष्मी नारायण एवं शिव मंदिर का निर्माण कराया।

विज्ञापन

पूर्वजों के किस्से सुन गौरवान्वित होती हैं लाल चरणदास की वंशज
गांव निवासी रेखा देवी (70) लाला चरणदास की सातवीं पीढ़ी की वंशज हैं जो आज भी अपने पूर्वजों के किस्से सुनकर गौरवान्वित होतीं हैं। वे बताती हैं कि परिवार के ज्यादातर लोग महानगरों में बस गए हैं। देखरेख के अभाव में कभी वैभव का प्रतीक रहीं कोठियां आज खंडहर में तब्दील हो गईं हैं।

यहां के बाजार में आते थे सैकड़ों गांवों के लोग
गांव के पूर्व प्रधान विपिन अग्रवाल बताते हैं कि पहले दूर-दूर तक कोई बाजार नहीं था। लाला चरणदास ने ही बड़े बाजार की स्थापना अपने काल में गांव में की थी। इस बाजार में कभी आसपास के सैकड़ों गांवों के लोग अपनी जरूरत का सामान खरीदने आते थे लेकिन धीरे-धीरे जमींदारी खात्मे के बाद यहां की रौनक खत्म होती चली गई।
विज्ञापन

कोटा में स्थापित शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला
इंसाफ के लिए आते थे दूर दूर से लोग
प्रधान संदीप कुमार बताते हैं कि उन्होंने बुजुर्गों से सुना है कि लाला चरणदास के वक्त गांव कोटा में अदालत लगती थी। दूर-दूर से लोग इंसाफ के लिए गांव में आते थे। वे बताते हैं कि गांव में आज भी लाला चरणदास के वंशजों की अकूत संपत्ति पड़ी है। उनकी हवेलियाें के खंडहर उनके वैभव की दास्तान बयां करते हैं।

विशालकाय नंदी और बारह मुखी शिवलिंग है स्थापित
लाला चरणदास द्वारा बनवाए गए प्राचीन लक्ष्मी नारायण एवं शिव मंदिर के पुजारी राकेश स्वामी बताते हैं कि पिछले 400 वर्षों से उनके पूर्वज मंदिर की सेवा करते आ रहे हैं। मंदिर में विशालकाय नंदी एवं बारह मुखी शिवलिंग स्थापित हैं। मंदिर के अंदर दीवारों पर उकेरे गए भित्ति चित्र श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। गांव में महाकाली का प्राचीन मंदिर है जिस पर प्रत्येक वर्ष तीन दिवसीय मेला लगता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें