पूर्वजों के किस्से सुन गौरवान्वित होती हैं लाल चरणदास की वंशज
गांव निवासी रेखा देवी (70) लाला चरणदास की सातवीं पीढ़ी की वंशज हैं जो आज भी अपने पूर्वजों के किस्से सुनकर गौरवान्वित होतीं हैं। वे बताती हैं कि परिवार के ज्यादातर लोग महानगरों में बस गए हैं। देखरेख के अभाव में कभी वैभव का प्रतीक रहीं कोठियां आज खंडहर में तब्दील हो गईं हैं।
यहां के बाजार में आते थे सैकड़ों गांवों के लोग
गांव के पूर्व प्रधान विपिन अग्रवाल बताते हैं कि पहले दूर-दूर तक कोई बाजार नहीं था। लाला चरणदास ने ही बड़े बाजार की स्थापना अपने काल में गांव में की थी। इस बाजार में कभी आसपास के सैकड़ों गांवों के लोग अपनी जरूरत का सामान खरीदने आते थे लेकिन धीरे-धीरे जमींदारी खात्मे के बाद यहां की रौनक खत्म होती चली गई।
कोटा में स्थापित शिवलिंग
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