- गंगोह रोड स्थित म्हाड़ी पर तीन दिवसीय मेला हुआ शुरू
- सुरक्षा की दृष्टि से तीन वॉच टावर, 150 पुलिस कर्मी और ड्रोन से नजर
फोटो समाचार-
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। श्री जाहरवीर गोगा म्हाड़ी पर लगने वाला तीन दिवसीय मेला मंगलवार से शुरू हो गया। बारिश के बीच श्रीजाहरवीर और बाबा गोरखनाथ के जयकारे गूंजे। बारिश भी निशान और प्रसाद अर्पित करने पहुंचे श्रद्धालुओं की आस्था को नहीं डिगा सकी। नेजे की अगुवाई में सभी छड़ी म्हाड़ी पर पहुंचीं।
मंगलवार को पूजन के बाद सभी छड़ियां अपने-अपने स्थान से शुगर मिल चौकी के पास एकत्रित हुईं। सभी छड़ियों का पूजन और शृंगार किया गया। छड़ियों का पूजन विवेक गुप्ता और श्री गुग्घा म्हाड़ी सुधार सभा के प्रधान अनिल कुमार ने किया। पूजन के बाद सभी छड़ियां दौड़ लगाती हुई म्हाड़ी स्थल पर पहुंचीं। म्हाड़ी पर पहुंचते ही श्री जाहरवीर के जयकारे गूंज पड़े। पूजन के दौरान महामंत्री विनय सिंगल, राजकुमार सैनी, जंगबहादुर, मुकेश, प्रदीप सैनी, भारत कर्णवाल, रवि प्रधान, मोनू पंडित आदि मौजूद रहे। मेले के साथ ही म्हाड़ी परिसर में भंडारे भी शुरू हो गए हैं। मेले में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हिमाचल, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान से भी श्रद्धालु आते हैं।
- आधी रात से ही शुरू हुआ मेला
छड़ियों के पहुंचने से पहले ही श्रद्धालु आधी रात से ही म्हाड़ी पर प्रसाद अर्पित करने के लिए पहुंचने लगे थे। सुबह होते-होते लंबी लाइन लग गई। सभी अपनी बारी का इंतजार करते हुए बाबा के जयकारे लगाते रहे। दिनभर मेले में अलग-अलग रंग दिखाई दिए। सुबह और शाम के समय जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ म्हाड़ी स्थल पर रही तो दोपहर के समय भीड़ कुछ हल्की रही।
- सुरक्षा के लिए तीन वॉच टावर, 150 पुलिसकर्मी और ड्रोन से नजर
म्हाड़ी स्थल पर लगे मेले में तीन दिनों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचती है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने इंतजाम किए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तीन अलग-अलग स्थानों पर वॉच टावर बनाए गए हैं। इसके अलावा 150 पुलिस कर्मी सुरक्षा में तैनात हैं। ड्रोन के जरिये हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने गंगोह रोड पर यातायात को भी डायवर्ट किया है। गंगोह रोड से गुजरने वाले वाहनों के लिए अलग रूट निर्धारित किया गया है।
ऐतिहासिक है लगने वाला मेला
श्री जाहरवीर गोगा की म्हाड़ी पर लगने वाला तीन दिवसीय मेला 26 छड़ियों के पहुंचने पर शुरू होता है। इस मेले का इतिहास 900 साल से भी अधिक पुराना है। बताते हैं कि 900 वर्ष पूर्व श्री जाहरवीर गोगा महाराज ने हरिद्वार जाते हुए गंगोह रोड पर अपनी सेना के साथ पड़ाव डाला था। तब, उन्होंने कबली भगत को तालाब से मछली पकड़ते देखा। कबली भगत ने अपनी आर्थिक स्थित के बारे में गोगा महाराज को बताया। इसके बाद बाबा ने कबली को नेजा देकर यहां म्हाड़ी बनवाने के साथ मेला भरने को कहा था। कहते हैं कि तभी से भाद्र माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि से मेला भरता है।