जानबूझकर खुद को खतरे में डालना सही नहीं
सहारनपुर। कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। सरकार की गाइड लाइन का पालन करना सबकी जिम्मेदारी है। जानबूझकर खुद को खतरे में डालना सही नहीं है। लापरवाह लोग खुदा को भी पसंद नहीं है। हेल्पलाइन पर रोजेदारों की शंकाओं का समाधान करते हुए यह बातें जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मोलाना कारी इस्हाक ने कही।
सवाल - दिल्ली के सीलमपुर निवासी मुश्ताक ने पूछा कि साप्ताहिक कोरोना कर्फ्यू की वजह से मस्जिदों में तरावीह और इबादत करने नहीं जा सके। अभी तक इबादत घर पर ही कर पाए हैं। उनको कुरान-ए-पाक की दस सूरतें ही याद हैं, तो क्या तरावीह पढ़ सकते हैं।
जवाब - अगर सिर्फ दस सूरतें ही याद हैं तो पहली दस रकातों में इन सूरतों को पढ़ें। अगली दस रकातों में उन्हीं सूरतों को दोहरा लें।
सवाल - कमेला कालोनी निवासी हाजी जमशेद ने पूछा कि हमारे चंद इलाकों में कुछ लोग लॉकडाउन का सही से पालन नहीं कर रहे हैं, जबकि यह लॉकडाउन हमारी ही हिफाजत के लिए है। ऐसी सूरत में शरीयत में क्या हुक्म है।
जवाब - हमें कोरोना संक्रमण को गंभीरता से लेने की जरूरत है। शरीयत के अनुुसार इस्लाम में इंसान की जान बहुत कीमती है। माल-दौलत के साथ जान का भी हिसाब अल्लाह को देना पड़ेगा। जान बूझकर अपने आपको खतरे में डालना सही नहीं है। लापरवाह लोग खुदा को पसंद नहीं है।