बेहट (सहारनपुर)। रीढ़ी मोहिद्दीनपुर स्थित विख्यात मदरसा जामिया इस्लामिया में शेखुल हदीस के पद पर आसीन मौलाना आशिक इलाही का शुक्रवार की रात 72 वर्ष की आयु में इंतकाल हो गया। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
चिलकाना क्षेत्र के गांव दुमझेड़ी निवासी हजरत मौलाना आशिक इलाही शेखुल हदीस पिछले काफी समय से मदरसे के छात्रों को शिक्षा दे रहे थे। शुक्रवार की रात में 11 बजकर 30 मिनट पर अचानक उनकी तबीयत खराब हुई। मदरसे की इंतजामिया कमेटी ने तुरंत उन्हें निजी चिकित्सक को बुलाकर उनका चैक अप कराया। इसके बाद चिकित्सक ने कमेटी को उन्हें तुरंत हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। इंतजामिया कमेटी के लोग उन्हें रात में उसी समय सहारनपुर के लिए रवाना हो गए, लेकिन हजरत ने रास्ते में ही अंतिम सांस लेकर दुनिया से रुख्सत हो गए।
उनके इंतकाल की खबर से इस्लामी जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम दर्शनों के लिए रीढ़ी मोहिद्दीनपुर में जन समूह उमड़ा रहा। कमेटी के लोगों ने पुलिस के साथ मिलकर व्यवस्था संभाली। उनकी नमाजे जनाजा जौहर की नमाज के दोपहर दो बजे हजरत मौलाना उमर ने पढ़ाई। इसके बाद उनके जनाजे को रीढ़ी मोहिद्दीनपुर के कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक किया। उनके जनाजे में मदरसे के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अख्तर, मौलाना मुफ्ती आमिर, मौलाना अब्दुल मालिक मुगीसी, मौलाना राशिद जमाल, काजी साजिद, हाफिज अशफाक, हाफिज साजिद, हाफिज, नसीम, मुफ्ती असजद, हाफिज अफजल आदि उलेमा आदि हजारों लोग शामिल रहे।