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खाद्य सामग्री बिकने के बाद आती हैं जांच रिपोर्ट

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सहारनपुर। खाद्य सुरक्षा विभाग मिलावटखोरी के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान खाद्य सामग्री के नमूने लिए जा रहे हैं। नमूनों की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही वह खाद्य सामग्री बिक रही है। यानी सीधे सीधे नमूनों की कार्रवाई जनता हित में नहीं बल्कि कागजी खानापूर्ति जैसी है। सहारनपुर में खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच के लिए कोई लैब नहीं है। नमूने जांच के लिए बनारस भेजे जाते हैं। जांच से जांच रिपोर्ट आने में कम से कम 14 दिन लगते हैं।
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त्योहारों पर ही आती है याद
खाद्य सुरक्षा विभाग केवल त्योहारों पर ही मिलावटखोरी के विरुद्घ अभियान चलाता है। जबकि तमाम तरह के मसालों, तेल, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्रियों में मिलावट का धंधा किसी से छुपा नहीं है।
चार दिन में 24 नमूने लिए
खाद्य सुरक्षा विभाग ने सात नवंबर से अभियान चलाया हुआ है। अभी तक कुल 24 नमूने लिए गए हैं। इनमें मावा के पांच, दूध के पांच, कुकिंग तेल के चार, मसालों के तीन, पनीर के तीन, छेना रसगुल्ला का एक नमूना शामिल है। इनके अलावा छेना रसगुल्ला और करीब 100 किलोग्राम मावा नष्ट भी किया है।
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भारी मात्रा में मावा नष्ट कराया
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मंगलवार को अभियान जारी रखा। हलवाई हट्टा में मावा के दो नमूने लिए गए। यहां करीब 100 किलोग्राम मावा नष्ट कराया गया, जिसमें से दुर्गंध आ रही थी। इसके अलावा देवबंद में पेठा के दो, पनीर, क्रीम और दूध का एक-एक नमूना लेकर जांच को भेजा गया।
ऐसा नहीं है कि केवल त्योहारों पर ही अभियान चलता है। समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। रही बात रिपोर्ट आने की तो नमूने बनारस भेजे जाते हैं, जहां से कम से कम 14 दिन में रिपोर्ट आती है। कभी-कभी रिपोर्ट आने में 25 से 28 दिन तक का समय लगता है।
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- रणधीर सिंह, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
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