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जान बूझकर रोजा तोड़ना अल्लाह से बगावत

Wed, 14 Jun 2017 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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मौलाना नदीमुल वाजदी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के देवबंद में मुकद्दस रमजान माह तमाम महीनों का सरदार तो है ही साथ ही इस महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर नेकी के बदले में इजाफा कर देता है।
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रमजान की इन्हीं विशेषताओं पर रोशनी डालते हुए अरबी के विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि इस महीने में अल्लाह अपने बंदों को खास नेमतों से नवाजता है।

मंगलवार को रमजान की फजीलतों का बखान करते हुए मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि रमजान में हर इबादत और नेक अमल का सवाब बढ़ा दिया जाता है और बंदा-ए-मोमिन की हर नेकी के बदले में इजाफा हो जाता है।
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इसलिए रमजान को महीनों का सरदार कहा गया है। उन्होंने कहा कि रमजान माह में तीन हिस्से हैं और हर हिस्से का नाम दिया गया है। पहले 10 दिन के हिस्से को रहमत कहा जाता है,

दूसरा हिस्सा जो रमजान की 11 तारीख से 20 रमजान तक होता है, उसे मगफिरत कहा जाता है और तीसरा हिस्सा जो 21 रमजान से शुरु होकर 30 रमजान को खत्म होता है उसे जहान्नुम से आजादी का हिस्सा कहा जाता है।

यानी रमजान माह में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत, मगफिरत और जहान्नुम से आजादी के दरवाजे खोल देता है। मौलाना वाजदी ने कहा कि यह सब चीजें रोजा रखने वाले को मिलती है जो अल्लाह की नजदीकी पाने के लिए और उसे खुश रखने के लिए रोजा रखता है।
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यदि कोई रोजा नहीं रखता और जान बूझकर ऐसा करता है तो वो अल्लाह से बगावत का ऐलान करता है और अल्लाह ऐसे बागियों को सजा देता है। उन्होंने कहा कि जो लोग चाहते हैं कि उन्हें दुनिया और दूसरी दुनिया में आराम की जिंदगी गुजारें वो सिर्फ रमजान ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी अल्लाह के हुक्म की तामील करें।
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