सहारनपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में भ्रष्टाचार किसी से छिपा नहीं है। जांच में 517 लाभार्थी ऐसे सामने आए हैं, जो योजना के लिए पात्र नहीं थे। अमर उजाला की टीम ने योजना की पड़ताल करने का प्रयास किया। कुल मिलाकर कुछ ऐसी चीजें सामने आई हैं, जिनसे पता चला है कि जिन लोगों ने सेटिंग करके आवेदन किए थे, उनके अपात्र होने के बावजूद जल्दी काम हुए, मगर जो वास्तव में जरूरतमंद और पात्र हैं, उनको दो से तीन साल से चक्कर कटवाए जा रहे हैं। अनेक लोगों से पांच-पांच बार तक आवेदन कराकर परेशान किया जा रहा है, मगर काम फिर भी नहीं हो रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में धांधली के कई मामले सामने आए हैं। कई लोग जेल भेजे गए हैं, जबकि करीब एक दर्जन लोगों पर एफआईआर हुई है। मगर इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नजर नहीं आ रहा है। हाल ही में ऐसे लाभार्थी सामने आए हैं, जिन्होंने अपात्र होते हुए लाभ ले लिया है। ऐसे लोगों को रिकवरी यानी भुगतान वापस करने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं। भुगतान वापस नहीं होने पर मुकदमे दर्ज होंगे। अमर उजाला की टीम जब नुमाइश कैंप स्थित डूडा में चल रहे प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यालय पहुंची। यहां पात्र लोग भटकते नजर आए। लोगों ने बताया कि उन्होंने किसी को पैसा नहीं दिया है और ना ही किसी ने मांगा है, मगर उनका काम भी नहीं हो रहा है। आरोप लगाया कि कर्मचारी उनको कई साल से चक्कर कटवा रहे हैं। चार से पांच बार तक आवेदन कराए जा चुके हैं, फिर भी लिस्ट में नाम नहीं है, जबकि उनके गांवों के ऐसे अपात्र लोगों के मकान बनकर तैयार हो चुके हैं, जो पहले ही दो मंजिला मकानों में रह रहे हैं। आरोप है कि अपात्रों ने दलालों को पैसा देकर ऐसा कराया है। शिकायत कर्ताओं में शहर के वार्ड नंबर आठ निवासी सिलवती, मल्हीपुर रोड निवासी बिनरोज, गांव मढ़ निवासी बती, बेहट रोड निवासी रेखा, अंजुम और देशराज आदि शामिल हैं।
पीड़ितों का दर्द
-- शांति नगर निवासी यशपाल ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले आवेदन किया था, मगर कभी कुछ कह दिया जाता है कभी कुछ। उन्होंने बताया कि कई बार आवेदन करने के बाद भी रिकॉर्ड में नाम नहीं है। पैसा किसी ने नहीं मांगा, मगर काम भी नहीं हो रहा है।
-- हलालपुर निवासी लोकेश ने बताया कि उन्होंने पहला आवेदन दो साल पहले किया था। अब चौथी बार आवेदन कराया गया है, मगर कोई सार्थक जवाब नहीं मिल रहा है। पीड़ित ने बताया कि मकान के इंतजार में उसकी पत्नी की मौत तक हो चुकी है।
-- हिम्मतनगर निवासी पेंटर हरिओम ने बताया कि उन्होंने पहला फार्म तीन साल पहले भरा था। दो बार फार्म भर चुके हैं। कई माह से कह रहे हैं कि नाम लिस्ट में है पैसा आ जाएगा, मगर पैसा नहीं आ रहा है। ऐसे में बार बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
--जनकनगर निवासी शहजाद अंसारी ने बताया कि उन्होंने सात माह पहले फार्म भरा था। कुल दो बार फार्म भर चुके हैं। करीब तीन माह से लिस्ट में नाम होने की बात कह रहे हैं, मगर दिखा नहीं रहे हैं। बोल रहे हैं कि पैसा खाते में आएगा, मगर नहीं आया है। ऐसे में भटक रहे हैं।
-- वर्धमान कॉलोनी निवासी मिथलेश ने बताया कि उसने पहला फार्म दो साल पहले भरा था। जांच करने के लिए आए थे, मगर पैसा अभी तक नहीं आया। आरोप लगाया कि जांच करने के लिए आए लोग 100-100 रुपये भी ले गए थे। मगर अभी तक लाभ नहीं मिला है।
किसी पात्र व्यक्ति से कई-कई बार आवेदन कराए जाने की कोई शिकायत अभी तक नहीं मिली है। जिन लोगों ने एक से अधिक बार आवेदन किए हैं, हो सकता है वह पात्र ना हो या फिर किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से आवेदन कराया गया हो। यदि कोई व्यक्ति पात्रता की शर्तों को पूरा कर रहा है और कोई समस्या है तो शिकायत दर्ज कराए। फिलहाल योजना में पारदर्शिता से काम कराया जा रहा है।
एके सिंह, प्रभारी परियोजना अधिकारी, डूडा/एसडीएम सदर।
हरिओम।- फोटो : SAHARANPUR
मिथलेस।- फोटो : SAHARANPUR
यशपाल सिंह।- फोटो : SAHARANPUR
लोकेश।- फोटो : SAHARANPUR
पीएम आवास के लिए डूडा के पूछताछ केंद्र जानकारी लेने पहुंचे लोग।- फोटो : SAHARANPUR