सहारनपुर। मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंगार में शुक्रवार की शाम जनमंच प्रेक्षागृह में स्थानीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने जहां शृंगार की काव्यधारा में श्रोताओं को डुबकी लगवाई, वहीं राष्ट्र प्रेम की भावनाएं भी श्रोताओं के दिल में भरी।
कवि सम्मेलन का उद्घाटन महापौर संजीव वालिया, विधायक राजीव गुंबर, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा, भाजपा महानगर अध्यक्ष राकेश जैन, तेज क्वात्रा, मेलाधिकारी राजेश यादव व मेला चेयरमैन प्रदीप ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन का शुभारंभ विनोद भृंग की सरस्वती वंदना से हुआ। कवि मोहित संगम ने अपनी रचना दुनिया के आकाओं जाओ यहां से, दूषित करो परिवेश नहीं, हम सीना ठोक के बोलेंगे, दुनिया में भारत जैसा देश नहीं, पढ़ी। डॉ. वीरेंद्र आजम ने पढ़ा कि गर लिखने का शौक है तुमको, आतंकी कैंप उड़ाने वाले वीरों का इतिहास लिखो तुम, अभिनंदन ने जिसको गिराया, उस एफ-16 का उपहास लिखो तुम। शिवेश ध्यानी ने पढ़ा-जब रणभूमि में इस भारत का सैनिक बल वीर उठेगा, वो बारूदों के मौसम वाला बादल चीख उठेगा। डॉ. संदीप मिश्रा ने प्रेम-सौंदर्य और शृंगार रस की धारा प्रवाहित की तो कवि सम्मेलन शिखर पर पहुंच गया। उन्होंने पढ़ा-घायल हूं कितना चोटों से तुमको आभास नहीं है, सब कुछ अर्पण है तुम पर फिर भी अहसास नहीं है। डॉ. आरपी सारस्वत ने पढ़ा कि नहीं जाओ अभी तुमसे जरूरी बात करनी है, जरा ठहरो अभी तुमसे जरूरी बात करनी है। इनके अलावा टीडीएस भारद्वाज, संदीप शर्मा, शायर प्रहलाद आतिश, सुधीर परवाज, डॉ. मोनिका शर्मा, पूनम सक्सेना व महेश पाल ने भी काव्य पाठ किया।
मेला गुघा के तहत जनमंच में आयोजित स्थानिये कवि सम्मेलन में कविता पाठ करती कवित्री- फोटो : SAHARANPUR
मेला गुघा के तहत जनमंच में आयोजित स्थानिये कवि सम्मेलन का आनंद लेते लोग- फोटो : SAHARANPUR