सहारनपुर में एक महीने अधिकारियों ने 20 गांवों में मिशन बनाकर सुबह तड़के दौड़ लगाई। लोगों में जागरूकता आई और पांच गांव लगभग खुले में शौच से मुक्त हो गए।
20 गांवों में लगभग 400 शौचालय बनाए गए। वे भी बिना किसी सरकारी अनुदान के। फिर भी अभी 338 परिवार ऐसे रह गए, जो शौचालय विहीन हैं।
जिले के गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए विकास विभाग के अधिकारियों ने 20 गांवों का चयन कर मिशन बनाया था।
अधिकारी गुड मार्निंग का मैसेज मिलते ही गांवों में पहुंचने लगे। एक माह तक निरंतर अधिकारियों ने गांवों में जाकर लोगों को जागरूक किया। इसका नतीजा भी सामने आया और जिले के पांच गांव के लोगों की सोच बदली।
पुंवारका के ग्राम खुर्द, वाजिदपुर, मुजफ्फराबाद के पथरवा, सरसावा के गांव गोविंदपुर और गंगोह के गांव गांधीनगर में लोगों ने खुले में शौच जाना बंद कर दिया। ये गांव लगभग पूरी तरह ही खुले में शौच से मुक्त हो गए।
हालांकि अधिकारी अभी औचक चेकिंग के बाद ही इसकी अधिकारिक तौर पर घोषणा करेंगे। लेकिन शेष गांव में अभी मिशन आधा ही है। इन 20 गांवों में 200 शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 200 शौचालय निर्माणाधीन हैं।
अधिकारी इसे अपनी विशेष सफलता मान रहे हैं कि ये 400 शौचालय उन्होंने लोगों को समझाकर बिना किसी सरकारी अनुदान के ही बनवाए हैं। लेकिन अभी मंजिल दूर ही नजर आ रही है। क्योंकि इन 20 गांवों में 338 परिवार अभी भी शौचालय विहीन हैं।
इनमें से कुछ तो ऐसे हैं जो बिना किसी सहायता के शौचालय का निर्माण नहीं कर सकते। इन 20 गांवों का खुले में शौच से मुक्त हो पाना आसान नजर नहीं आ रहा है।