दरअसल, 2024 के चुनाव को लेकर हर दल ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। रालोद मुखिया जयंत चौधरी भी इमरान मसूद को यहां का दामन थमाकर पश्चिमी यूपी में बड़ा संदेश देना चाहते है। 2024 के चुनाव में इसका फायदा भी हो सकता है, क्योंकि पश्चिमी यूपी के मुस्लिमों में इमरान मसूद की अच्छी पकड़ मानी जाती है।
रालोद में शामिल होने की मिली सहमति
बताया जा रहा है कि सोमवार को भी इमरान मसूद और जयंत चौधरी की मुलाकात हुई है। सूत्रों की मानें तो जयंत ने रालोद में शामिल होने के लिए सहमति दे दी है। आजाद समाज पार्टी के साथ भी इमरान का संपर्क हुआ है।
हालांकि आजाद समाज पार्टी की तरफ से अभी पार्टी में लेने का संकेत नहीं मिला है। इसके अलावा इमरान के पास समजवादी पार्टी की तरफ से भी ऑफर है। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि इमरान की नैया किसके किनारे पर जाकर ठहरेगी।
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कांग्रेस, सपा, बसपा और अब ?
इमरान ने विधानसभा चुनाव 2022 से पहले जनवरी में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था, जो कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था, क्योंकि प्रियंका गांधी ने उन्हें पूरी जिम्मेदारी दे रखी थी। उनके पार्टी छोड़ने से प्रियंका गांधी ने नाराजगी भी जताई थी।
इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था। यहां पर टिकट नहीं मिलने पर इमरान ने नौ महीने बाद ही बगावती तेवर दिखाकर बसपा में एंट्री मारी थी। कुछ दिन पहले राहुल गांधी की तारीफ के बाद उन्हें बसपा से निष्कासित कर दिया था।
बता दें कि इमरान मसूद सहारनपुर लोकसभा सीट से तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन अभी तक जीत हासिल नहीं हुई। वह सहारनपुर जिले की मुजफ्फराबाद सीट (अब बेहट सीट) से साल 2007 में निर्दलीय विधायक रहे हैं।
कांग्रेस, रालोद और सपा समेत अन्य दलों से भी संपर्क हुआ है। 10 सितंबर को कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में मंथन के बाद आगामी फैसला लिया जाएगा। - इमरान मसूद, पूर्व विधायक
राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी पार्टी छोड़ने से नाराज हैं। ऐसे में संभावना नहीं है कि पूर्व विधायक इमरान मसूद को कांग्रेस में शामिल किया जाए। - मुजफ्फर अली, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
पार्टी हाईकमान की तरफ से अभी ऐसा कोई आदेश-निर्देश नहीं आया है और न ही आधिकारिक तौर पर कोई वार्ता हुई है। - राव केसर, जिलाध्यक्ष रालोद