सहारनपुर। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि देश के विकास में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उनके लक्ष्य में खुद के विकास के साथ समाज का उत्थान भी होना चाहिए, तभी उच्च शिक्षा की सार्थकता भी है। वह बृहस्पतिवार को जनमंच प्रेक्षागृह में आयोजित मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह को बतौर कुलाधिपति संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने मां शाकंभरी देवी सिद्धपीठ के साथ ही दारुल उलूम का भी जिक्र किया।
कुलाधिपति ने कहा कि आगामी 25 साल देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनमें विकसित राष्ट्र की नींव तैयार होगी। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि आप ऐसे समय में उपाधि हासिल कर रहे हैं, जब देश आपकी ओर देख रहा है। युवाओं से यह भी अपील की कि 2024 के लोक सभा चुनाव में जागरूक मतदाता बनकर वोट दें। आंगनबाड़ियों की हालत पर चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी और जन प्रतिनिधियों से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने को कहा।
उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थाओं में एक शिक्षक पर 25 से 30 विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी रहती है, लेकिन एक-एक आंगनबाड़ी पर 50 से 60 बच्चे हैं। कुलाधिपति ने कहा कि सहारनपुर प्राचीन काल से ही धर्म और भारतीय परंपरा का केंद्र रहा है। यहां माता शाकंभरी देवी सिद्धपीठ, बाबा भूरादेव का मंदिर, मां बाला सुंदरी मंदिर, भूतेश्वर महादेव मंदिर के साथ ही इस्लामिक शिक्षा का केंद्र दारुल उलूम भी है, जो विश्व प्रसिद्ध है।
उन्होंने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकारें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अनेक प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहीं हैं। सरकार के प्रयासों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश रोजगार देने के प्रमुख केंद्रों में से एक है। दीक्षांत समारोह के बाद राज्यपाल दिल्ली रोड स्थित रेनबो स्कूल पहुंची, जहां आंगनबाड़ियों को किट वितरित की गई। यहां भी उन्होंने संबोधन किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल जनपद में 24 घंटे रहीं। वह बुधवार की शाम करीब छह बजे सहारनपुर पहुंचीं थीं। सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम के बाद बृहस्पतिवार को कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद वह शाम को रवाना हो गईं।