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कृषि भूमि खरीदकर काटी जा रहीं अवैध कॉलोनियां

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मल्हीपुर रोड़ स्थित विद्युत पावर लाइन के नीचे काटी गयी कॉलोनी - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। शहर और आसपास के इलाकों में जमीन के कारोबार पर माफिया सक्रिय हैं। नियम कायदों को ताक पर रखकर कॉलोनी काटी जा रही हैं। कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने के नियम का भी कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है, जिसका फायदा माफिया उठा रहे हैं। यह खेल सियासत से गठजोड़ और प्रशासनिक स्तर पर सेटिंग से चल रहा है। इससे ना केवल सरकार को राजस्व के रूप में नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि अनाधिकृत कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों को भी ठगा जा रहा है।
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नियमों के विपरीत अधिकांश कॉलोनियां सहारनपुर शहर के बाहरी रास्तों पर काटी जा रही हैं। इनमें दिल्ली रोड, बेहट रोड, जनता रोड, मल्हीपुर रोड, नवादा रोड, चिलकाना रोड आदि स्थान शामिल हैं। इस खेल में शामिल भूमाफिया द्वारा किसानों से कृषि भूमि को सस्ते दाम पर खरीदा जा रहा है। भूमि को कृषि उपयोगी दर्शाकर खरीदा जाता है, लेकिन फिर उसमें कॉलोनी काटनी शुरू कर दी जाती है। क्योंकि कृषि भूमि की रजिस्ट्री करने में स्टांप शुल्क कम लगता है, जबकि आवासीय और व्यवसायिक उपयोग के लिए रजिस्ट्री कराने में छह गुना तक ज्यादा स्टांप शुल्क जमा करना पड़ता है।
हाईटेंशन लाइन के टावर की परवाह नहीं
मल्हीपुर रोड पर एक कॉलोनी ऐसी जमीन पर काट दी गई है, जिसके बीच से हाइटेंशन विद्युत लाइन गुजर रही है और लाइन का टॉवर भी लगा हुआ है। बावजूद कॉलोनी काटकर प्लाट बेचे जा रहे हैं। लोगों को सस्ते दाम पर प्लाट बेचने का झांसा देकर ठगने की कोशिश हो रही है। जबकि प्लाट खरीदने पर मकान बनाने के बाद विद्युत लाइन को लेकर भी विवाद रहेगा।
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यूनिवर्सिटी निर्माण की कवायद से बढ़ी सक्रियता
जनता रोड पर पुंवारका में राज्य विश्वविद्यालय का निर्माण होना है। ऐसे में इस मार्ग पर भी बड़ी संख्या में अनाधिकृत कॉलोनियां कटने लगी हैं। किसानों से सड़क किनारे की जमीन खरीदकर प्लाटिंग की जा रही है। जबकि सहारनपुर विकास प्राधिकरण से इन कॉलोनियों के मानचित्र भी स्वीकृत नहीं कराए गए हैं।
दलाल कराते हैं नक्शे पास कराने में सेटिंग
अनाधिकृत कॉलोनियों में विकास प्राधिकरण की शह पर तेजी से अवैध निर्माण हो रहे हैं। अवैध कॉलोनियों के मनमाने प्लान पर प्राधिकरण मुहर लगा रहा है। इसमें जमीन की जांच और निर्माण से आसपास के इलाकों में होने वाली समस्याओं का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा। दलालों की सक्रियता से ही मनमाने काम कराए जा रहे हैं।
भू उपयोग बदलने की प्रक्रिया निर्धारित है, उसी अनुसार भू उपयोग बदला जा सकता है। बैनामा कराने में गलत नक्शा दर्शाने और स्टांप अपवंचन (चोरी) के कई मामलों में जुर्माना तक हुआ है। भू उपयोग बदलवाने के मामलों पर नजर रखी जा रही है। - अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी।
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