सहारनपुर। जल के बिना जीवन संभव नहीं है। इन दिनों भूगर्भ जल सप्ताह चल रहा है, जिसमें जल को बचाने के प्रति जागरूक किया जा रहा है, लेकिन जनपद में रोजाना हजारों लीटर पानी कहीं वाहनों की धुलाई तो कहीं पशुओं के स्नान में बर्बाद कर दिया जाता है। कई जगहों पर खुली टंकियों से शुद्ध पेयजल बहता हुआ दिख जाता है।
जिले के 11 विकासखंडों और शहरी क्षेत्र में बीते चार वर्षों में भूगर्भ जल स्तर दस से 17 मीटर तक नीचे गया है। सरकारी आंकड़े इसके गवाह है। पानी का अंधाधुंध दोहन की वजह से स्थिति गंभीर बनती जा रही है। पिछले कई दिनों से रेलवे कॉलोनी में पाइप लाइन फटी हुई थी, दो सप्ताह से हजारों लीटर पानी सड़क पर बह गया। भूगर्भ जल सप्ताह शुरू हुआ तो बृहस्पतिवार को ही पाइप लाइन को ठीक कराया। इसी तरह शहर और देहात क्षेत्रों में सरकारी टंकियों से पानी बहता दिख जाता है। इसके अलावा रोजाना पशुओं के स्नान भी अत्यधिक जल का दोहन होता है। यही हालात रहे तो भविष्य में एक-एक बूंद पानी को तरसना पड़ सकता है।
अवैध रूप से भी चल रहे धुलाई सेंटर
सहारनपुर। महानगर सहित जनपद में 170 से अधिक वाहनों के धुलाई सेंटर है। शहर सहित विकासखंड बलियाखेड़ी, पुवांरका, मुजफ्फराबाद, साढ़ौली कदीम, सरसावा, नकुड़, गंगोह, नानौता, रामपुर मनिहारान, देवबंद, नागल में धुलाई सेंटर चल रहे हैं। इसके अलावा अवैैध रूप से चल रहे धुलाई सेंटरों पर पानी की बर्बादी होती देेखी जा सकती है। इसको लेकर चार माह पूर्व केंद्रीय जल संसाधन सचिव ने सहारनपुर मंडल स्तर के अधिकारियों की बैठक में चिंता जाहिर की थी।
लोगों को भी समझनी होगी जिम्मेदारी: जाफर
सहारनपुर। भूगर्भ जल विभाग के अवर अभियंता जाफर अली ने बताया कि जनपद में भू-गर्भ जल स्तर चार सालों 17 मीटर तक नीचे गया है। जल के अंधाधुंध दोहन को रोकने लेकर कड़े कदम उठाए जाएंगे। जल की बर्बादी नहीं होने दी जाएगी। इसको लेकर शासन की गाइडलाइन के अनुसार कार्रवाई भी होगी। नागरिकों भी जल बचाने के प्रति सजग होना पड़ेगा। तभी स्थिति में सुधार हो सकेगा।
सहारनपुर के किशनपुरा में वाहनो की घुलाई के दौरान व्यर्थ बहता पानी- फोटो : SAHARANPUR