सहारनपुर। जीआईएस सर्वे के बाद कई गुणा तक बढ़े टैक्स की आपत्तियों के निस्तारण में पता चला है कि संबंधित भवनों का सर्वे ठीक से नहीं हुआ। भाजपा पार्षदों और संबंधित नागरिकों का आरोप है कि सर्वे कंपनी की लापरवाही से ऐसा हुआ है, जबकि निगम अधिकारियों का कहना है कि भवन स्वामियों के सहयोग नहीं करने के कारण यह स्थिति बनी है।
कर अधीक्षक सुधीर शर्मा का कहना है कि कुछ मामले हो सकते हैं, जिनमें सर्वेयर की गलती रही हो, लेकिन ज्यादातर मामलों में भवन स्वामियों ने सर्वेयर को सहयोग नहीं किया। जब सर्वेयर मौके पर पहुंचा तो लोगों ने उसे भवन दिखाने से मना कर दिया। कई भवन ऐसे हैं, जो बाहर से देखने में दो या तीन मंजिला दिखे, क्योंकि लोग इस तरह से निर्माण करते हैं, जिससे मकान बाहर से भव्य दिखे।
सर्वेयर को बाहर से जैसा दिखा वह उसी हिसाब से सर्वे किया। आपत्ति के बाद जांच में पता चला कि जो भवन बाहर से तीन मंजिला दिख रहा था, पीछे वह दो मंजिला है। जो भवन बाहर से दो मंजिला दिख रहा था, पता चला कि मोम्टी के बाद पीछे कुछ बना ही नहीं है और वह सिंगल ही है। उधर, उप सभापति एवं पार्षद मुकेश गक्खड़ और पार्षद मोहर सिंह आदि का कहना है कि सर्वे कंपनी के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण अनेक लोगों के भवनों पर गलत टैक्स लगा है।
बिना सोचे डाल रहे आपत्ति
जीआईएस सर्वे के बाद करीब तीन हजार आपत्तियां नगर निगम को प्राप्त हुई हैं। इनमें से 2,538 आपत्तियां गलत पाई गई हैं। यानी उनका भवन जितना पहले दर्ज था जीआईएस सर्वे में भी उतना ही दर्ज है। ऐसे भवनों का टैक्स भी नहीं बढ़ा है, क्योंकि दरें पुरानी ही हैं। बढ़ा केवल उनका है, जिनके भवनों का क्षेत्रफल वास्तविक से कम दर्ज था।
केवल व्यावसायिक भवनों को नोटिस
कर अधीक्षक सुधीर शर्मा ने बताया कि जीआईएस सर्वे के नोटिस केवल व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के स्वामियों को भेजे जा रहे हैं। आवासीय भवनों के नोटिस जारी नहीं किए गए हैं। यदि किसी को गलती से आवासीय भवन का नोटिस मिला है तो वह निगम में संपर्क कर सकता है।