सहारनपुर। कुपोषण को खत्म करने के लिए तमाम प्रयास हुए, लेकिन उसके बाद भी कुपोषण पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। इसकी एक वजह यह भी है कि वर्ष 2012 से बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में कई अहम पद खाली चल रहे हैं, जिसकी वजह से योजनाएं प्रभावित होती हैं।
जिले के 11 विकासखंड और शहरी क्षेत्र में 3410 आंगनबाड़ी हैं, लेकिन 199 आंगनबाड़ियों और 531 सहायिकाओं के पद खाली पड़ हैं। इसके अलावा 12 सीडीपीओ की आवश्यकता है, मगर मात्र चार ही सीडीपीओ हैं। इसके अलावा 50 सुपरवाइजर के पद खाली चल रहे हैं। इस वजह से 25 केंद्रों पर एक सुपरवाइजर से काम चलाना पड़ता है, जबकि 89 सुपरवाइजरों की आवश्यकता है। इनके अलावा 15 लिपिकों के पद भी रिक्त हैं। हर माह अन्नप्राशन और गोद भराई कार्यक्रम होता है, जिसमें बच्चों को पुष्टाहार दिया जाता है और गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोलियों सहित पौष्टिक आहार के रूप में फल, सब्जी एवं अन्य खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं, लेकिन कर्मचारियों की कमी होने की वजह से कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन और गोद भराई दिवस आयोजित नहीं करने में दिक्कत आती है, जिससे पूरी तरह कुपोषण का खात्मा करने में विभाग को परेशानी उठानी पड़ रही है।
वर्ष----कुपोषित बच्चों की संख्या----------अति कुपोषित बच्चों की संख्या
2017------52410 -------------------------18105
2018------41869--------------------------12547
2019------33825--------------------------6910
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विकासखंड़------------------आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या
सरसावा----------------------281
नकुड़-------------------------253
मुजफ्फराबाद----------------355
नागल-----------------------303
बलियाखेड़ी------------------293
देवबंद-----------------------238
रामपुर मनिहारान----------232
पुवांरका--------------------285
नानौता--------------------201
साढ़ौली कदीम-------------249
गंगोह---------------------320
शहरी क्षेत्र------------------615
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कर्मचारियों की कमी होने की वजह से योजनाओं के संचालन में दिक्कत आती है, लेकिन फिर भी विभाग का प्रयास रहता है, लेकिन सभी कार्यक्रम पूरी सफलता से संचालित हों। तीन वर्षों में कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है, जो पद रिक्त चल रहे हैं, उन केंद्रों पर भी तालमेल बनाकर अन्नप्राशन और गोद भराई दिवस आयोजित किया जाता है। -आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी