जिला अस्पताल के प्रवेश द्वार की सड़क में हुए गड्ढे।
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जिला अस्पताल की तमाम व्यवस्थाओं की तरह सड़के भी जर्जर हो चुकी है। जो मरीजों के लिए मुसीबत बनीं है। आलम यह है कि सड़कों में गहरे और चौड़े गड्ढे बन गए है। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन आंख बंद करके बैठा है। इसके लिए काफी हद तक शासन भी जिम्मेदार है।
जिला अस्पताल में सड़क का निर्माण वर्ष 2008 में कराया गया था। जो कुछ ही दिन बाद टूटना शुरू हो गई थी। 2012 तक सड़क टूटकर जर्जर हालत में पहुंच गई थी। उस समय सड़क के पुन: निर्माण की जरूरत महसूस हुई तो विभाग ने 28 लाख का बजट तैयार कर शासन को भेजा था।
उस दौरान बजट स्वीकृत भी हो चुका था। जिससे उम्मीद थी कि सड़कों का शीघ्र सुधार होगा। मगर शासन की अनदेखी और हिलाहवाली के चलते चार साल बाद भी आज तक बजट जारी नहीं हो सका है।
जिला अस्पताल प्रबंधन की ओर से शासन समेत नगर निगम और प्रशासनिक अफसरों को कई बार पत्र लिखकर सड़क निर्माण की मांग की जा चुकी है, लेकिन किसी अधिकारी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसी का नतीजा है कि हर दिन जिला अस्पताल पहुंचने वाले हजारों मरीजों को खस्ताहाल सड़क के चलते भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अब फिर भेजा 56 लाख का बजट
जिला अस्पताल की ओर से सड़क निर्माण के लिए 2012 में शासन को 28 लाख रुपये का बजट बनाकर भेजा गया था। उस समय बजट पास हो गया था। बजट स्वीकृत होने के चार साल बाद भी नहीं मिलने पर इस बार दोबारा 56 लाख रुपये का बजट बनाकर शासन को भेजा गया है।
बजट न मिलने के कारण बनीं समस्या
जिला अस्पताल की खस्ताहाल सड़क के लिए शासन से बजट स्वीकृत होने के बावजूद भी धनराशि नहीं मिल सकी। इसी के चलते अस्पताल की सड़कों को दुरुस्त नहीं किया जा सका। अब शासन को नए सिरे से 56 लाख रुपए का बजट बनाकर भेजा गया है।
- डा. आशा शर्मा, सीएमएस।